अंबाला। ऐतिहासिक गुरुद्वारा शीशगंज साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के शहीदी दिवस को समर्पित तीन दिवसीय समागम के दौरान शनिवार देररात को कीर्तन दरबार सजाया। कीर्तन दरबार में भारी गिनती में शहर और आसपास के क्षेत्र की संगत ने हाजिरी भरते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष शीश नवाया और कीर्तन श्रवण किया।
कार्यक्रम में श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर साहिब के हजूरी रागी भाई इंदरपाल सिंह ने सतनाम, सतनाम, सतनाम, वाहेगुरु, वाहेगुरु, वाहेगुरु, तन-मन-काठ-काठ और तिलक जंजू राखा प्रभ तांका शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। इसके साथ ही श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर से हजूरी रागी भाई गुरमीत सिंह शांत के जत्थे ने रागों के रहस्य खोलते हुए अपनी सुरीली आवाज में शब्द कीर्तन कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। उन्होंने संगत को भी रागों व सुर की जानकारी दी।
कार्यकारिणी सदस्य तरविंदरपाल सिंह और संगत की मांग पर हजूरी रागी भाई गुरमीत सिंह शांत ने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब अंबाला शहर में जल्द ही रागों में कीर्तन करने का प्रशिक्षण देने का आश्वासन भी दिया। समागम में गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के हजूरी रागी भाई सुखदेव सिंह ने सब कुछ तुमरे हाथ है, तुम ही होए सहाये और अन्य शब्दों के कीर्तन किए।
हरियाणा कमेटी के वरिष्ठ उपप्रधान सुदर्शन सिंह सहगल ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज को नमन करते हुए संगत से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को गुरु इतिहास से जोड़ें। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब ने जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर रहा था, तो गुरु साहिब ने हिंदू धर्म की रक्षा करने और धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए अपना बलिदान दिया था।
हम सब को भी उनसे शिक्षा लेकर अपने धर्म के प्रति अडिग रहना चाहिए। कार्यकारी सदस्य टीपी सिंह ने संगत के दर्शन करते हुए एचएसजीएमसी की ओर से बैसाखी पर पाकिस्तान धार्मिक यात्रा के लिए पासपोर्ट संस्था के अधीन गुरुद्वारा साहिबान या मुख्य कार्यालय कुरुक्षेत्र में जमा करवाने की अपील की। उन्होंने अपने संबोधन में हरियाणा कमेटी द्वारा किए जा रहे कार्यों का उल्लेख भी किया। इस मौके पर गणमान्य व गुरुद्वारा प्रबंधक भी मौजूद रहे।
अंबाला सिटी स्थित गुरुद्वारा साहिब में आयोजित समागम में नाम सिमरण करते कीर्तनी जत्थे। प्रवक्ता