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कुरुक्षेत्र की 48 कोस की भूमि देवताओं को प्रिय : कमलानंद गिरि

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शहर के श्री रघुनाथ मंदिर में चल रहे सत्संग समारोह में प्रवचन करते महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद ग
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श्री रघुनाथ मंदिर में भगवद्गीता एवं श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम का छठा दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित भगवद्गीता एवं श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम के छठे दिन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस की भूमि देवताओं को अत्यंत प्रिय है। यह यज्ञ, तप और भजन की भूमि है, जहां ऋषि-महर्षियों ने बैठकर धर्म का आचरण किया है। उन्होंने कहा कि कुछ विशेष भूमियों पर किया गया सत्कर्म करोड़ों गुना फल प्रदान करता है और देवता सहर्ष उसे ग्रहण करते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर अच्छे कर्मों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता।
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उन्होंने बताया कि कौरव और पांडवों के पूर्वज राजा कुरु के नाम पर इस क्षेत्र का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा। महाभारत युद्ध के दौरान वेदव्यास द्वारा संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की गई, जिसके माध्यम से संजय ने धृतराष्ट्र को संपूर्ण युद्ध का वृतांत सुनाया। संजय ने ही धृतराष्ट्र को गीता के अठारह अध्याय और सात सौ श्लोक सुनाए। स्वामी कमलानंद गिरि ने कहा कि जो मन का दास है, वह संसार का दास बन जाता है। यदि मन की हर इच्छा मानी जाए तो व्यक्ति स्वामी नहीं, दास बनकर रह जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन में मेरा-तेरा बना रहेगा, तब तक शांति संभव नहीं।
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