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Ambala News: वीरों की भूमि तेपला, यहां हर घर में सिपाही

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साहा से सटा तेपला गांव। संवाद
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संदीप कुमार
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अंबाला। छावनी से 15 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव जहां की मिट्टी ऐसे लोगों को जन्म देती है, जो देश की सरहद की रक्षा करते हैं। आज यहां घर-घर से एक ही आवाज आ रही है कि मेरे जवान दुश्मनों के दांत खट्टे करके ही लौटेंगे।
हम बात कर रहे हैं साहा से सटे तेपला गांव की। इस गांव से जिला में सबसे ज्यादा जवान सेना में विभिन्न पदों पर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो गांव से 250 से अधिक लोग सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में देश की सेवा कर रहे हैं। तेपला गांव के सबसे ज्यादा जवान सिख रेजिमेंट में है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम जब तेपला पहुंची तो लोग अपने घरों में टीवी पर हालात पर नजर रखते दिखे।
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इनके नाम से हैं द्वार, स्कूल और समाधि
अंबाला जगाधरी राजमार्ग पर स्थित तेपला गांव में प्रवेश करते ही बलिदानी विक्रमजीत सिंह के नाम से द्वार बना है। इस द्वार पर बलिदानी विक्रमजीत सिंह का फोटो लगा है। इसके अलावा गांव में ही बलिदानी मेजर गुरप्रीत सिंह के नाम से शहीद मेजर गुरप्रीत सिंह मेमोरियल स्कूल है। इसके अलावा उनकी समाधि और प्रतिमा भी बनाई है।
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देश को ब्रिगेडियर तक दिए गांव ने

तेपला गांव के सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र सिंह निंदा बताते हैं कि उनके गांव की आबादी 3500 के करीब है। इसके अलावा गांव में लगभग हर घर से एक, दो, चार यहां तक की एक घर से छह सदस्य सेना में है। इस गांव ने देश को सिपाही से लेकर ब्रिगेडियर तक दिए हैं। गांव के सबसे ज्यादा जवान सिख रेजिमेंट में है। उनका गांव नशे से दूर है। वह युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करते हैं।
तेपला गांव के पांच जवानों ने दी शहादत
2018 में विक्रम जीत सिंह जम्मू एंड कश्मीर के गुरेज सेक्टर में बलिदान हुए।

1999 में मेजर गुरप्रीत सिंह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में बलिदान हुए।
2004 में लांस नायक हरजिंद्र सिंह पुंछ राजौरी में बलिदान हुए।

2012 में नायक विनोद सिंह अरूणाचल प्रदेश में बलिदान हुए।

साहा से सटा तेपला गांव। संवाद

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