अंबाला। बेसहारा गोवंश को सहारा और कुत्तों के नसबंदी की योजना कागजों में ही दम तोड़कर रह गई। नगर परिषद छावनी के लोगों को इन दोनों समस्याओं से निजात दिलाने में नाकाम साबित होे रही है। कभी नियमों का हवाला देकर निविदा सिरे नहीं चढ़ती, अगर निविदा सिरे चढ़ जाए और ठेका शुरु हो जाए तो पशुओं को रखने के लिए गोशाला नहीं मिलती।
यह हालात हैं अंबाला छावनी के जोकि स्वच्छता के पायदान पर खरा उतरने के लिए जी-तोड़ मेहनत तो कर रही है, लेकिन कागजों में न की धरातल पर। बेसहारा गोवंश और कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। छावनी की शायद ही कोई ऐसी गली, मोहल्ला या चौक-चौराहा होगा जो शायद बेसहारा गोवंश और कुत्तों की जद में न हो। कुछ लोगों ने तो कुत्तों को रखवाली के लिए पाला हुआ है, बेशक वो कई लोगों को काटकर घायल कर चुके हों।
रोजाना आ रहे मामले
अंबाला छावनी में रोजाना कुत्ता काटने के आधा दर्जन मामले आ रहे हैं। कुत्ते कभी छोटे बच्चों को अपना शिकार बन रहे हैं तो कभी बुजुर्गों को। वही वाहनों के पीछे दौड़ते कुत्तों के कारण कई हादसे भी हो चुके हैं। अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर रोजाना 10 से 15 टीके कुत्ता काटने के उपचार के लिए लग रहे हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंबाला छावनी के लिए यह समस्या एक अभिशाप बनती जा रही है।
रुका बेसहारा गोवंश को पकड़ने का काम
बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए नगर परिषद की तरफ से लगभग डेढ़ माह पहले ठेका जारी किया गया था। ठेकेदार ने अभी पशु पकड़ने ही शुरु किए थे कि गोशालाओं ने हाथ खड़े कर दिए कि उनके पास पशुओं को रखने के लिए जगह नहीं है और न ही चारे आदि की व्यवस्था है। इसलिए ठेकेदार ने भी बीच में ही काम छोड़ दिया है और इसकी जानकारी बाकायदा नप अधिकारियों को भी दे दी है।
वर्जन
कुुत्तों की नसंबदी से जुड़ी फाइल मान्यता के लिए भेजी हुई है। जैसे ही मान्यता मिलेगी तो तुरंत काम शुरू करा दिया जाएगा। गोशाला में जगह न होने के कारण बेसहारा गोवंश को पकड़ने का कार्य अभी रुका हुआ है।
विनोद बैनीवाल, सीएसआई, नप सदर।