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Ambala News: बालवाटिका में चार कोने बनाकर बच्चों को पढ़ाएंगे शिक्षक

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अंबाला। राजकीय प्राथमिक स्कूलों में बालवाटिका तीन के अंतर्गत बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न गतिविधियां सिखाई जाएंगी। विद्यार्थी की नींव को प्राथमिक स्कूल शिक्षक बालवाटिका स्तर से ही तैयार करेंगे। शिक्षक बच्चों को कक्षा कमरे में चार अलग-अलग कोने बनाकर पढ़ाएंगे। बालवाटिका कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में पहली कक्षा को पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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छावनी के बीसी बाजार राजकीय स्कूल में शनिवार को बालवाटिका तीन के प्रशिक्षण के पहले बैच का अंतिम दिन रहा। इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को बच्चों की तरह सिखाया गया। इसके बाद यह शिक्षक स्कूलों में विद्यार्थियों को उसी तरीके से पढ़ाई करवाएंगे।
यह कार्यक्रम खंड टू बीईओ सुदेश रानी, बीआरसी नरोत्तम शर्मा, स्कूल प्रधानाचार्या रेखा के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें केआरपी की भूमिका नेहा अग्रवाल, बलजिंद्र सिंह और डीआरजी की भूमिका बीआरपी मंजू पवार, बीआरजी की भूमिका एबीआरसी मीना कुमारी ने निभाई।
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इन चार तरह के कोना से सीखेंगे बच्चे
दरअसल, एक कक्षा कमरे में विद्यार्थियों को सिखाने के लिए विभिन्न गतिविधि करवाई जाएंगी। इनमें कक्षा के हर कोने में गतिविधि होगी। जैसे कला कोना इसमें क्ले रंग, पेंट, रंगीन कागज आदि की सामग्री होगी।
अभिनय कोना में किचन सेट, डॉक्टर सेट, पपेट आदि होंगी। जोड़-तोड़ कोना में आकार किट, ब्लॉक्स, जिगसॉ, पजल, क्रम कार्ड व अन्य सामग्री होंगी। किताबों का कोना में बिग कुक, चित्र पुस्तकें चित्र चार्ट, कविता, पोस्टर जैसे पठन सामग्री होगी। खोज कोना में तराजू, चुंबक, बीज, पौधे, माने वाला टेप व अन्य सामान्य सामाग्रियां, जिसमें बच्चे आसपास के वातावरण के बारे में खोजबीन कर सकें।
बच्चे का सर्वांगीण विकास करना है उद्देश्य
प्रतिदिन बच्चे 4.5 घंटे के लिए बालवाटिका कक्षा में आएंगे। इस दौरान बच्चे कहानियों, निर्देशित खेल, मुक्त खेल चर्चा गतिविधियों से जुड़ेंगे। विद्यार्थियों को रोजाना शेड्युल बनाकर पढ़ाई करवाई जाएगी। असल में इस योजना का उद्देश्य बच्चे का संज्ञानात्मक विकास, अन्नमय कोष और प्राणमय कोष, भाषा और साक्षरता विकास, रचनात्मक और सौंदर्य विकास, सामाजिक-भावनात्मक और नैतिक विकास करना है।
स्कूलों में कमरों की कमी से ज्यादा दिक्कत
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि विभाग की ओर से शिक्षकों को बालवाटिका का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वह बालवाटिका स्तर से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकें, लेकिन शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि शिक्षकों की कमी के साथ ही कई स्कूलों में कमरों की संख्या भी कम है। ऐसे में इस योजना को सिरे चढ़ाने में शिक्षकों के सामने चुनौती भी होगी।
वहीं, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अंबाला सुधीर कालड़ा ने बताया कि प्राथमिक शिक्षकों को बालवाटिका में बच्चों को पढ़ाने के लिए खंड स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कई बैच में चलेगा।
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