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Ambala News: छुट्टियों में घर-घर जाएंगे शिक्षक, स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की होगी पड़ताल

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- ड्रॉपआउट को लेकर सर्वे शुरू करने के निर्देश, सामाजिक संस्थाओं का भी लेंगे सहयोग
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले के सरकारी स्कूलों में लगातार कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। हर साल किसी न किसी कारण से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या विभाग के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूल छोड़कर जाने वाले विद्यार्थियों की पहचान, उनके कारणों की जांच और उन्हें दोबारा शिक्षा के दायरे में लाने के लिए व्यापक सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे जनवरी में ही होना है। शीतकालीन अवकाश से ही इसे शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।

शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजें। इसमें हर उस बच्चे की जानकारी शामिल करनी होगी, जो बीते समय में किसी भी कक्षा से बीच में ही पढ़ाई छोड़ गए। रिपोर्ट में विद्यार्थियों की पारिवारिक स्थिति, स्कूल छोड़ने का कारण, स्थान परिवर्तन, आर्थिक जरूरत या किसी अन्य वजह का ब्योरा भी देना अनिवार्य होगा।
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पिछले वर्ष 77 बच्चों की हुई थी पहचान
पिछले वर्ष जिले में ऐसे करीब 77 विद्यार्थियों की पहचान हुई थी जिन्होंने किसी न किसी कारण से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। इन बच्चों में अधिकांश संख्या प्रवासी मजदूरों के बच्चों की पाई गई थी, जिनके माता-पिता काम के सिलसिले में दूसरे जिलों व राज्यों में स्थान बदलते रहते हैं। परिवारों के इस निरंतर पलायन के कारण बच्चे लंबे समय तक स्कूल से जुड़े नहीं रह पाते और पढ़ाई प्रभावित होती है। विभाग अब इस श्रेणी के बच्चों पर विशेष फोकस कर रहा है, ताकि उन्हें किसी न किसी निकटस्थ स्कूल से जोड़ा जा सके।

विभाग करेगा मदद
सर्वे पूरा होने के बाद सभी मामलों को श्रेणियों में बांटकर उन पर अलग-अलग रणनीति बनाई जाएंगी। जहां आर्थिक कारण सामने आते हैं, वहां सामाजिक संगठनों और प्रशासन की मदद से सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। वहीं, प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए विशेष ट्रैकिंग सिस्टम अपनाने की योजना भी विभाग तैयार कर रहा है ताकि जिस स्थान पर परिवार जाए, वहीं बच्चे की पढ़ाई जारी रखी जा सके।
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वर्जन

जनवरी और जुलाई माह में इस प्रकार के सर्वे किए जाते हैं। सर्वे पूरा होने के बाद जिले की वास्तविक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और हर विद्यार्थी को स्कूल तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए।
- ज्योत्सना मिश्रा, जिला समन्वयक, समग्र शिक्षा।

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