अंबाला सिटी। पॉक्सो के मामलों पर जिला बाल कल्याण समिति ने सख्ती बरतने का फैसला किया है, जिससे कि बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।
इसके लिए शिक्षा विभाग से पॉक्सो के मामलों में संलिप्त या संदिग्ध होने वाले अध्यापकों की जानकारी मांगी थी। इसमें सामने आया है कि दो अध्यापकों पर इस तरह के केस चले थे। इसमें से एक मामले में अध्यापक को बरी कर दिया गया, जबकि दूसरा मामला अभी चल रहा है।
इसी आधार पर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग व जिला बाल विभाग की टीम जल्द ही एक नीति बनाएगी। इसमें इस तरह के मामलों में संलिप्त या बरी अध्यापकों को लड़कियों के स्कूलों में नहीं लगाया जाएगा।
पॉक्सो के विषय पर बैठक में फैसला
पॉक्सो के मामलों में शुक्रवार को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित, जिला बाल कल्याण समिति के साथ बैठक हुई। इसमें आयोग से अनिल राठी और श्याम शुक्ला पहुंचे। उन्होंने इस दौरान महिला थाना और ऑब्जरवेशन होम में व्यवस्थाएं जांची। आयोग के अधिकारियों ने महिला पुलिस थाना में चाइल्ड फ्रेंडली रूम बनाने के निर्देश दिए, जिससे कि किसी भी बच्चे के साथ कोई अपराध होता है तो उसे एक सकारात्मक माहौल में काउंसलिंग दी जा सके। इसके साथ ही महिला पुलिस अधिकारियों को विशेष जुवेनाइल ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसमें जिला बाल कल्याण समिति पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे। बैठक में सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा, डीसीपीओ ममता रानी और सोशल वर्कर दीपिका भी मौजूद रही।
पॉक्सो पीड़ित रात्रि में नहीं होंगे पेश
आयोग के अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि अगर पॉक्सो का मामला पुलिस के पास रात के समय आता है तो पुलिस को रात के समय जिला बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने की जरूरत नहीं होगी। पुलिस फॉर्म 42 भरकर सीसीआई में रात आठ बजे से लेकर सुबह 11 बजे तक पीड़ित बच्चे को रख सकती है। इसके बाद जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करना होगा। कई बार देखने में आता था कि देर रात में ही पॉक्सो के मामले आते हैं। इस कारण बच्चों को रात के समय पेश करने में भी परेशानी होती थी। अब यह समस्या नहीं रहेगी।
वर्जन
बैठक में मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा। इसके साथ ही पॉक्सो को लेकर अध्यापकों की नीति बनने के बाद ही निर्देशों पर कार्य किए जाएंगे।
रंजिता सचदेवा, चेयरपर्सन जिला बाल कल्याण समिति अंबाला।