अंबाला सिटी। घरेलू मामलों में अपनों की जली कटी बातें आपसी विवाद को बढ़ावा दे रही हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एडीआर सेंटर में प्रत्येक माह 40 से 50 नए मामले सिर्फ घरेलू विवादों के आ रहे हैं। रोजाना के आंकड़े को देखें तो रोजाना करीब दो मामले एडीआर में अतिरिक्त सुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं। इन विवादों में ज्यादातर देखने में आया है कि परिवार के अन्य सदस्य पति व पत्नी को ताने मारते हैं। जिसके कारण विवाद थानों व कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में एडीआर सेंटर मदद का हाथ बनकर इन मामलों को सुलझाने में जुटा हुआ है। प्रत्येक माह एडीआर सेंटर में 10 मामलों का निपटारा हो रहा है।
छह महीने तक होती है काउंसलिंग
एडीआर सेंटर में जब भी मामला आता है तो दोनों पक्षों को बुलाया जाता है। इसके बाद छह महीने में तीन बार काउंसलिंग करवाई जाती है। जिसके लिए एडीआर की ओर से काउंसलर भी नियुक्त किए गए हैं। तीन काउंसलिंग के बार भी अगर हालात नहीं सुधरते तो उन मामलों को वापिस भेज दिया जाता है। इसके बाद आगे की कार्रवाई दोनों पक्ष अपने आधार पर ही करते हैं।
कानूनी मदद भी बनी सहारा
कई बार घरेलू विवादों में महिला या पुरुष पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर होता है। ऐसे में एडीआर केंद्र की ओर से अधिवक्ता भी मुहैया करवाया जाता है। यह अधिवक्ता मामले में कानूनी मदद करते हैं। जिसके लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है।