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Ambala News: गरीबी के दलदल से निकल हॉकी में कमल खिला रहे सूरमा

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संदीप कुमार
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अंबाला। ग्रामीण क्षेत्रों से निकले अंबाला के कुछ युवा राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी में अपना नाम चमका रहे हैं। उनकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। वह गांव से ही नहीं निकले बल्कि ऐसे खेल को चुना जिसकी सुविधाएं पहले अंबाला में अधिक नहीं थी।
इसके साथ ही गरीबी को मात देकर वह लगातार आगे बढ़ रहे हैं। दरअसल गांव बंबा और मियां माजरा के रहने वाले करीब 25 खिलाड़ी, रोजाना राजकीय मिडिल स्कूल मियां माजरा में तैयारी करते हैं। यह खिलाड़ी सुबह और शाम के समय अपने खेल की तैयारी करते हैं तो दोपहर को राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बकनौर में अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ाई करते हैं। इन खिलाड़ियों ने हालात को मात देकर राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम चमकाया है। इसमें 19 लड़के और 6 लड़कियां हैं। इनमें तीन नेशनल, 20 स्टेट, दो जिलास्तर पर नाम कमा चुके हैं।
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गौरतलब है कि पांच वर्ष पहले गांव मियां माजरा के राजकीय मिडिल स्कूल में हेडमास्टर राजिंद्र ने दो बच्चों से हॉकी खेल की शुरुआत की थी। आज यहां 25 खिलाड़ी तैयार हो गए हैं।

चना खाकर करते हैं प्रैक्टिस
गांव बकनौर निवासी वंश ने बताया कि वह गांव बकनौर स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं का छात्र है। चार साल से हॉकी खेल रहा है। उसने अपने बडे भाई प्रवीण कुमार को देखकर हॉकी खेली। अब वह दोनों भाई एक साथ हॉकी टूर्नामेंट में प्रतिभाग करते हैं। डाइट के नाम पर दोनों सुबह काले चने खाकर करते हैं। वह दो बार स्कूल स्टेट में विजेता रहा है।
प्री नेहरू कप टूर्नामेंट में दूसरे स्थान पर रहा। जिलास्तर पर उसके तीन स्वर्ण पदक हैं। प्रवीण कुमार ने बताया कि वह 12वीं का छात्र है वह चार बार स्टेट खेला है और दो बार दूसरे स्थान पर रहा। यह प्रतियोगिता रोहतक, शाहबाद, हिसार और सोनीपत में हुई। इसके अलावा वह छह बार जिलास्तर पर खेल चुका है, इसमें चार स्वर्ण पदक है।
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पिता करते हैं मजदूरी
कोच कोमल ने बताया कि हरमन पांच साल से हॉकी खेल रहा है। एक बार भोपाल में नेशनल खेल चुका है जिसमें इसकी भागीदारी रही। छह पांच स्टेट खेल चुका है, पांच जिलास्तर पर खेल चुका है जिसमें दो स्वर्ण पदक है। इसके अलावा रहमान और राहुल ने एक एक नेशनल खेले दोनों तीसरे स्थान पर रहे, उन्होंने दो प्री नेहरू कप खेले, दोनों पांच स्टेट खेल चुके हैं और पांच जिला स्तर पर खेल चुके हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के पिता मजदूरी करते हैं।
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