बराड़ा। अनाज मंडी में सोमवार को सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू हो गई है। किसानों को इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 7280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपज का भुगतान मिलेगा, जो पिछले साल के 6760 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है।
इससे किसानों को प्रति क्विंटल 520 रुपये का सीधा लाभ होगा। पिछले साल बराड़ा मंडी में सूरजमुखी की कुल आवक लगभग 13,000 क्विंटल रही थी। इस बार अधिकारियों को उम्मीद है कि यह आंकड़ा पार हो सकता है, क्योंकि जिले में सूरजमुखी की बुवाई पहले से अधिक क्षेत्र में की गई है और मौसम भी फसल के अनुकूल रहा है।
मंगलवार को भारत सरकार की एजेंसी नेफेड बराड़ा में सूरजमुखी खरीद कर रही है। नेफेड की ओर से राज्य स्तरीय टीम के राज्य प्रमुख सुधीर कुमार, राज्य सहायक राजिंदर खन्ना,राज्य सहायक रूहानी, क्षेत्र प्रतिनिधि अरुण कुमार ने खरीद केंद्र का भी जायजा लिया।
किसानों में उत्साह, लेकिन उम्मीदें भी
खरीद शुरू होते ही मंडी में किसानों की हलचल बढ़ गई है। कई किसान ट्रॉलियों में फसल लेकर मंडी पहुंचे। किसानों ने एमएसपी बढ़ने पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि महंगाई के अनुपात में लागत लगातार बढ़ रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि नाकाफी है। सज्जन माजरी के किसान बलवंत सिंह का कहना है कि एमएसपी बढ़ना अच्छी बात है, पर खाद, बीज और डीजल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए मुनाफा सीमित ही रह जाता है।
तिलहन को बढ़ावा देने की जरूरत : कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुभाष राठी के अनुसार सूरजमुखी एक तिलहन फसल है, जिसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है। यह फसल अल्प अवधि की होती है और गेहूं के बाद बोई जा सकती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का मौका मिलता है। सरकारी खरीद और एमएसपी में वृद्धि से इसका रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।