अंबाला सिटी। महिला शक्ति की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करने की पुरजोर जरूरत है। शहर के ज्यादातर शिक्षण संस्थानों के नजदीक छात्राओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की भारी कमी दिखने में आ रही है। इससे कहीं न कहीं छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। उपरोक्त शब्द सिटी के प्रीत नगर पुलिस लाइन स्थित गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में महिला शिक्षकों ने कहे। मौका था अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम का।
वहीं शिक्षिकाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विभिन्न प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों के बाहर विशेष तौर पर छुट्टी के समय पुलिस प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करने चाहिए ताकि शरारती तत्व स्कूल में आने-जाने वाली छात्राओं को तंग न कर सकें। इसी प्रकार शिक्षण संस्थानों में नैतिक शिक्षा, मेडिकल सुविधाओं सहित छात्राओं के लिए साप्ताहिक काउंसलिंग करनी चाहिए। इसमें छात्राएं से निजी समस्याओं संबंधित चर्चा करने के विकल्प बनाने की जरूरत है।
शिक्षिका जितेंद्र कौर ने कहा कि ज्यादातर छात्राएं निजी समस्याओं को छुपाकर रखती हैं। आने वाले दिनों में वह समस्या गंभीर हो जाती है।शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के लिए साप्ताहिक काउंसलिंग करने का प्रावधान होना चाहिए।
शिक्षिका पुनिता शर्मा ने कहा कि ज्यादातर शिक्षण संस्थानों के आसपास शरारती तत्व घूमते रहते हैं। शिक्षण संस्थानों के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें ताकि छात्राओं को कोई शरारती तत्व किसी प्रकार से तंग न कर सके।
शिक्षिका असिम बजाज का कहना है कि अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को बेहतर संस्कार दें। विशेष तौर पर लड़कों को बेटियों का सम्मान करने जैसे संस्कार देने चाहिए। लड़कों की सोच में बदलाव करना जरूरी है।
शिक्षिका पूनम कौशिक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों पर विभिन्न प्रकार की पाबंदियां लगाई जाती हैं। जिससे ज्यादातर लड़कियां अपने पारिवारिक सदस्यों के दबाव में रहती हैं,। बेटियों को भी आजादी दी जानी चाहिए।
शिक्षिका सविता हुड्डा का कहना है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए निजी स्कूलों की तर्ज पर जिला प्रशासन द्वारा बस सेवा उपलब्ध करवाने की जरूरत है। जिससे वह अपने शिक्षण संस्थानों तक सुरक्षित पहुंचेगी।
शिक्षिका अमरजीत कौर ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के लिए मेडिकल सुविधा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा का विकल्प होना बहुत ही जरूरी है। नैतिक शिक्षा ग्रहण करने से जहां वह अपने परिवार के लिए उदाहरण बनेंगी।