अंबाला सिटी। महिलाओं के ऊपर होने वाले अत्याचार की तुलना में अब घरेलू कलह की वजहों ने हैरान कर दिया है। पारिवारिक विवाद के मामलों में ंलगातार तेजी देखने को मिल रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो महीनों में महिला थाने में सर्वाधिक मामले पारिवारिक कलह के आए हैं। थाने में 80 मामले ऐसे दर्ज किए हैं जिनमें पति-पत्नी का विवाद सर्वाधिक हैं। इसके साथ ही शादी के बाद के प्रेम प्रसंग भी महिलाओं के जीवन में जहर घोल रहे हैं। महिला पुलिस काउंसलर के माध्यम से महिलाओं की इस परेशानी को दूर करने का काम रही है, मगर मध्यस्थता केंद्र तक पहुंचने तक भी समाधान पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है। वहीं कोर्ट में 2,225 मामले महिलाओं ने अपने ऊपर हुए अत्याचार के दर्ज कराए हैं।
मध्यस्थता भी नहीं आ रही काम
अंबाला जिले में दो मध्यस्थता केंद्र हैं। इन केंद्रों के पास वर्ष 2024 में कुल 366 मामले आए थे, जिनमें से 92 का सफल समाधान हुआ और 171 मामले समाधान तक नहीं पहुंच सके। इसी प्रकार वर्ष 2025 में कुल 468 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 131 का सफल समाधान हुआ। जबकि 198 मामलों में सफलता नहीं मिल सकी।
घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा के वर्ष 2024 में 97 मामले आए थे, जिनमें से 6 सफल हुए और 25 में समाधान नहीं हो सका। वहीं, वर्ष 2025 में 163 मामले आए। जिनमें से 5 सफल हुए और 126 मामलों में समाधान नहीं हो सका।
तलाक संबंधी मामले
तलाक के (हिंदू विवाह अधिनियम या अन्य कानून) वर्ष 2024 में 210 मामले आए थे, जिनमें 54 का सफल समाधान हुआ और 149 में समाधान नहीं निकला। वर्ष 2025 में भी 210 मामले आए, जिनमें से 24 सफल रहे और 179 मामलों में सफलता नहीं मिली।
रखरखाव के मामले
वर्ष 2024 में 210 मामले दर्ज हुए, जिनमें 23 सफल रहे और 85 में समाधान नहीं हुआ। वर्ष 2025 में 158 मामले आए, जिनमें 17 सफल रहे और 134 मामलों में समाधान नहीं निकला।
बाल अभिरक्षा, सहायता या मिलने के अधिकार
यह वर्ष 2024 में 29 मामले आए थे, जिनमें से 6 सफल हुए और 20 में समाधान नहीं हुआ। वर्ष 2025 में 24 मामले आए, जिनमें 4 का सफल समाधान हुआ और 10 में समाधान नहीं हो सका।
इस साल अभी तक 80 मामले महिलाओं ने दर्ज कराए हैं। इनमें सबसे अधिक पारिवारिक विवाद से जुड़े हैं। महिलाओं के ऊपर अत्याचार की तुलना में पारिवारिक विवादों की संख्या सर्वाधिक बढ़ी है।
-सतविंदर कौर, प्रभारी, महिला थाना