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Ambala News: एक साल में किचन गार्डन पर खर्च कर दिए 25.35 लाख, सब्जियों का पता नहीं

Tue, 10 Mar 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला छावनी के सीनियर सेकेंड़री संस्कृति स्कूल का कीचन गार्डन। संवाद
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अंबाला सिटी। सरकारी स्कूलों में किचन गार्डन सुविधा से जुड़ा चौकाने वाला खुलासा हुआ है। एक साल में 25.35 लाख रुपये किचन गार्डन बनाने पर खर्च कर दिए। इतने की सब्जियां बच्चों को मिली या नहीं इसका पता नहीं। इतने खर्चे के बाद भी शिक्षक खाना (कुकिंग काॅस्ट) बनाने की लागत को लेकर परेशान हैं। पिछले वित्त वर्ष में किचन गार्डन के लिए मिले फंड से तुलना करें तो 18 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए। इतना ही नहीं मौलिक शिक्षा विभाग के इस आंकड़े ने जनप्रतिनिधियों को भी हैरान कर दिया है।
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प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण स्कीम के तहत जिला में 767 सरकारी स्कूलों को 5 हजार रुपये प्रति स्कूल किचन गार्डन के दिए गए। इस हिसाब से जिला में 38 लाख रुपये वितरित होने थे। रिकॉर्ड में आंकड़े 25.35 लाख रुपये का खर्चा दर्शा रहे हैं। मौलिक शिक्षा विभाग का दावा है कि इतनी धनराशि को जिला के सभी स्कूलों में वितरित की गई, जिससे स्कूलों ने अपने यहां किचन गार्डन तैयार किया और उनमें उगी सब्जियों को बच्चों को खिलाया। यह दावा तब किया जा रहा है जब कई सरकारी स्कूलों में तो किचन गार्डन के लिए जगह तक नहीं है।



पिछले वित्त वर्ष में 7 लाख रुपये हुए थे खर्च



शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024-25 में किचन गार्डन के लिए सात लाख रुपये का खर्चा किया गया था, इसके लिए मौलिक शिक्षा विभाग ने पांच हजार रुपये प्रति स्कूल फंड जारी किया था। तब अंबाला के 130 स्कूलों को इस सुविधा के लिए चयनित किया था। इस हिसाब से आकलन करें तो 130 स्कूलों में साढ़े 6 लाख रुपये खर्च किए गए। जबकि शिक्षा विभाग सात लाख रुपये का दावा कर रहा है। अब यह 50 हजार रुपये कैसे आए और कहां लगे इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है।
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लागत पर पड़ रहा था बोझ, अच्छी सब्जियाें की उपलब्धता

मिड डे मील में हमेशा से ही स्कूलों के प्रभारियों को समस्या रहती थी कि खाना बनाने की लागत कम रह जाती है। सब्जियों के दाम भी आसमान छू जाते हैं। इसी को देखते हुए मौलिक शिक्षा विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 130 स्कूलों को चयनित किया, इसके बाद यह योजना जिला के सभी स्कूलों में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लागू कर दी गई। तब साेचना था कि अच्छी सब्जियां बच्चों को मिलेंगी और खाने में लागत भी कम होगी पर लागत तो कम नहीं हुई। बल्कि 5 हजार रुपये प्रति स्कूल भी खर्चा बढ़ गया। इस 5 हजार रुपये की धनराशि से किचन गार्डन के लिए उपयुक्त औजार, बीज व फेंसिंग करनी थी। कुछ स्कूलों को अच्छा काम भी किया और वह पूरे सीजन में अच्छी सब्जियां व सलाद की सब्जियां भी उगा रहे हैं। मगर कुछ स्कूलों में यह योजना सफल ही नहीं हो सकी।



मिड डे मील योजना में अन्य खर्चे

मिड डे मील योजना में प्राथमिक कक्षाओं के 28413 तो माध्यमिक कक्षाओं के 21833 विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन कराया जाता है। इसके लिए कुक कम हेल्पर को सात हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।



सांसद वरुण ने मांगा जवाब

मौलिक शिक्षाधिकारी ने यह रिकॉर्ड दिशा कमेटी के सामने प्रस्तुत किया था। इसमें किचन गार्डन का आंकड़ा देखते हुए सांसद वरुण चौधरी ने इस पर सवाल उठाया था। सांसद ने कहा कि यह आंकड़ा ठीक नहीं लग रहा था। 25 लाख रुपये किचन गार्डन के नाम पर खर्च हुए तो क्या सब्जी भी बच्चों को इतनी मिली या नहीं। कुछ स्कूलों से सूचना मिली कि शिक्षक खड़े हैं और बच्चे कस्सी चला रहे हैं। यह भी ठीक नहीं। इसकी डीईईओ को इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

अंबाला छावनी के सीनियर सेकेंड़री संस्कृति स्कूल का कीचन गार्डन। संवाद

अंबाला छावनी के सीनियर सेकेंड़री संस्कृति स्कूल का कीचन गार्डन। संवाद

अंबाला छावनी के सीनियर सेकेंड़री संस्कृति स्कूल का कीचन गार्डन। संवाद

अंबाला छावनी के सीनियर सेकेंड़री संस्कृति स्कूल का कीचन गार्डन। संवाद

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