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Ambala News: मां के साथ दोपहर के निवाले से पहले सड़क हादसे में बेटे की मौत

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अंबाला। शंभू बॉर्डर से कुछ ही दूरी पर पंजाब के राजपुरा में मंगलवार को हुए भीषण हादसे ने अंबाला के तीन युवाओं को लील लिया जबकि एक युवक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। सूचना मिलने के बाद अंबाला में रहने वाले युवाओं के परिजनों व रिश्तेदारों में मातम पसर गया। घटना की सूचना मिलते ही जहां परिजन राजपुरा की तरफ दौड़े तो वहीं स्थानीय लोगों ने परिवार के अन्य सदस्यों का ढांढस बंधाया। हादसे में मरने वाले प्रियांशु नरूला ने हादसे से कुछ देर पहले ही अपनी मां को फोन किया था। शाम को लौटने के बाद संग खाना खाने की बात कही थी। मगर वह लौट के आ पाता इससे पहले ही अंबाला की सीमा से महज कुछ दूरी पर काल का ग्रास बन गया।
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फोटो नंबर -
बेटे संग आखिरी निवाले को तरस गई मां
अंबाला कैंट की ट्रिब्यून कॉलोनी निवासी 17 वर्षीय प्रियांशु नरूला कैंट के मेजर आरएन कपूर का छात्र था। 12वीं में मेडिकल स्ट्रीम से 60 प्रतिशत अंक के साथ परीक्षा पास की थी। परीक्षा पास करने के बाद प्रियांशु की फार्मेसी में दाखिला लेने की रूचि थी। इसी की जानकारी लेने के लिए वह अपने दोस्तों के साथ पटियाला की चितकारा यूनिवर्सिटी में गया था। मृतक के पिता कपिल देव नरूला ने बताया कि उनकी कालीबाड़ी मंदिर के निकट केमिस्ट की शॉप है। दोपहर 3 बजे प्रिंयाशु का फोन मां के पास आया था। बोल रहा था कि शाम तक घर आ जाएगा और एक साथ ही खाना खाएंगे। इसी बीच मां ने जब दोपहर 4 बजे फोन किया तो बंद आ रहा था। दोस्त को फोन लगा तो वो किसी दूसरे व्यक्ति ने उठाया। तब जाकर इस हादसे का पता चला। जब तक पहुंचे तो सब कुछ गंवा बैठे थे। उन्होंने कहा कि होनी को कौन टाल सकता है। प्रियांशु की बहन भी पढ़ाई कर रही हैं।

अस्पताल में जिंदगी मौत से जूझ रहा मनन, परिवार मांग रहा दुआएं

इस भीषण हादसे में सुरक्षित बचा अंबाला कैंट केडी अस्पताल स्थित दुर्गा मंदिर के निकट मनन कपूर पटियाला की चितकारा यूनिवर्सिटी का छात्र था। गंभीर रूप से घायल होने पर मनन को उपचार के लिए राजपुरा से अंबाला के एमएम अस्पताल में रेफर कर दिया था। जिसके बाद परिजन अंबाला सिटी के एक निजी अस्पताल में ले गए। अभी मनन जिंदगी मौत से जूझ रहा है।
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आईलेट्स कर विदेश जाने की तैयारी कर रहा था खुशविंद्र
मृतक खुशविंद्र बब्याल के सैनिक नगर का रहने वाला था। वह दो भाई है और पिता आर्मी से रिटायर्ड है। परिजनों ने बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं थी कि खुशविंद्र पटियाला गया है। वह घर से महेश नगर जाने के लिए निकला था। 12वीं की पढ़ाई करने के बाद खुशविंद्र चंडीगढ़ में जॉब करने लग गया था। कुछ समय पहले नौकरी छोड़ने के बाद स्टडी वीजा पर ही विदेश जाने के लिए आईलेट्स कर रहा था।
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