- 2.70 लाख को नोटिस हुए थे जारी, 12.59 फीसदी मामलों का निस्तारण बाकी
- आज विशेष अभियान, बूथों पर शिविर और घर-घर दस्तावेज जुटाने की कवायद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले प्रशासन के सामने लंबित मामलों को निपटाने की चुनौती है। जिले में 2,70,161 नोटिस जनरेट किए गए हैं लेकिन इनमें से 34,007 मामलों में अभी सुनवाई लंबित है। कुल मामलों में लंबित मामलों की हिस्सेदारी 12.59 प्रतिशत है। इन्हें निपटाने के लिए प्रशासन के पास महज एक दिन शेष है। 7 से 9 अक्तूबर तक विशेष अभियान शुरू किया है।
इन तीन दिनों में उन मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां नोटिस मिलने के बाद भी संबंधित मतदाताओं ने जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करवाए हैं। प्रशासन की टीमें ऐसे मतदाताओं के घर भी पहुंच रही हैं और आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अनंत कुमार शर्मा ने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए, ताकि कोई पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।
प्रशासन ने नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि और समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज संबंधित बीएलओ के पास जमा करवाएं। दावे और आपत्तियों का निस्तारण दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार किया जाएगा।
अब तक 2.10 लाख लोगों का नाम कट चुका
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में 2.10 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम अब तक सूची से बाहर हो गए हैं। इन मतदाताओं ने एसआईआर के तहत निर्धारित प्रपत्र नहीं भरे या नोटिस जारी होने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं की। अब सूची से बाहर हुए लोगों को दोबारा मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा।
छह नवंबर को आएगी अंतिम सूची
एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। जिले में 15 जून से एसआईआर का कार्य चल रहा था। प्रक्रिया शुरू होने से पहले जिले में 12,25,661 मतदाता दर्ज थे। एसआईआर के दौरान इनमें से 10,15,131 मतदाताओं यानी 82.82 प्रतिशत का रिकॉर्ड डिजिटल हुआ। वहीं 2,10,530 मतदाताओं ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसके चलते इनके नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं।