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सीबीए ने सील की दुकानें, सड़कों पर आए दुकानदारों

Tue, 27 Oct 2015 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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करीबन डेढ़ साल की कशमकश और जद्दोजहद के बाद आखिरकार कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) ने सोमवार को रक्षा मंत्रालय के आदेश पर भगत सिंह मार्केट में अधिकतर दुकानों को सील कर कब्जा लेने की सूचना उनके शटरों पर चस्पा कर दी है। इस दौरान नायब तहसीलदार सतबीर चौहान बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में उपस्थित रहे।इस कार्रवाई के दौरान मार्केट में भारी तनाव बना रहा और दुकानदारों व सीबीए कर्मियों, अफसरों के बीच तीखी बहस भी हुई। लेकिन विभिन्न थाना प्रभारियों के नेतृत्व में मौजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दुकानदार खास विरोध नहीं कर पाए। अंतत: सीबीए अफसरों ने अपनी मौजूदगी में वहां उन तमाम दुकानों को सील कर दिया, जिनकी लीज करीबन डेढ़ साल पहले खत्म हो चुकी थी।  कई दुकानदाीरों की तो खुली दुकानों को बंद करवाकर उसे सील की गई, तो कई दुकानों के ताले पर ही सीबीए ने अपनी सील लगा दी। फिलहाल ये दुकानदार सड़कों पर आ गए हैं। इन दुकानदारों का कहना है कि वे इस मामले में अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे। उनके अनुसार सरकार ने उन्हे बेरोजगार कर दिया है। इस अवसर पर डिफेंस इस्टेट अफसर वरूण कालिया, सीबीए के कर अधीक्षक नरेश शर्मफा, सहायक इंजीनियर सतीश गुप्ता, भूप सिंह, सुभाष चावला, इत्यादि अफसर उपस्थित रहे। डिफेंस इस्टेट अफसर वरूण कालिया ने बताया कि ये कार्रवाई रक्षा मंत्रालय के आदेशों पर ली गई है। दुकानों की लीज खत्म हो गई थी। इसलिए उन्हे कब्जे में ले लिया गया है।
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यह है मामलादरअसल, भगत सिंह मार्केट सेना के अधीनस्थ कैंटोनमेंट बोर्ड की मार्केट है, जहां काफी दुकानें मौजूद हैं। यहां दुकानदारों को 1984  में दस साल के लीज एग्रीमेंट पर इन दुकानों को किराए पर दिया गया था। 10 साल बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने इन्ही दुकानदारों की लीज  को 5-5 साल तक चार बार एक्टेंशन दी। यानी इन दुकानदारों के पास ये दुकानें 30 साल तक लीज पर रही। लेकिन अब ये लीज अप्रैल 2014 को खत्म हो गई थी। तभी इन दुकानदारों को दुकानें खाली करने के नोटिस थमा दिए गए थे। लेकिन लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा आने की वजह से कार्रवाई थोड़ी  धीमी पड़ गई। इसी चक्कर में एक साल और गुजर गया, लेकिन अब सोमवार को सीबीए ने दुकान पर कब्जा ले लिया है।
मंत्री का प्रस्ताव हुआ था खारिजपिछले साल से ही कैंटोनमेंट बोर्ड इन दुकानों को खाली करवाने में आमादा था, लेकिन तत्कालीन विधायक एवं वर्तमान में मंत्री अनिल विज ने इस पर अपना कड़ा ऐतराज जता दिया था। विज का ऐतराज बाकयदा सीबीए की सदन की कार्रवाई में लिखा गया था और कैंटोनमेंट बोर्ड ने संबंधित प्रस्ताव को अपने आला अफसर जीओसी-इन-सी को भिजवा दिया था। जिसमें विधायक अनिल विज के ऐतराज को भी शामिल किया था। दुकानदारों की ओर से पैरवी करते हुए बतौर विधायक अनिल विज ने ये प्रस्ताव किया था ये दुकानें इन्ही दुकानदारों को फिर से लीज पर दे दी जाएं और उनका थोड़ा किराया बढ़ा दिया जाए। ताकि उनका रोजगार बरकरार रहे।लेकिन लॉस ऑफ रेवेन्यू का आधार बनाकर विज के ऐतराज और उनके प्रस्ताव दोनों को ही सेना के आला अफसरों ने खारिज (रिवोक) कर दिया है। क्योंकि अभी तक इस भगत सिंह मार्केट में कैंटोनमेंट बोर्ड को प्रति दुकान का किराया प्रति माह 1500-1800 रुपये तक प्राप्त हो रहा था। लेकिन इन दुकानों को लीज पर दिए जाने की जो पिछले दिनों खुली बोली हुई है, उसमें प्रति माह प्रति दुकान का किराया 15000 से 20000 रुपये तय हुआ है। इसलिए सेना के आला अफसरों ने इसे कैंटोनमेंट  बोर्ड का राजस्व नुकसान बताते हुए इन दुकानों को खाली करवाकर उनका कब्जा नए लीज धारकों को दिए जाने के आदेश जारी कर दिए थे।
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सांसद के प्रयासों को भी लगा झटका मंत्री विज के साथ-साथ अंबाला सांसद रतनलाल कटारिया के प्रयास भी फिलहाल असफल रह गए हैं। सांसद इसी मसले को लेकर पिछले दिनों रक्षामंत्री मनोहर पार्रीकर से मिले थे। रतनलाल कटारिया ने पिछले दिनों भगत सिंह मार्केट के दुकानदारों से मिलकर उन्हे आश्वासन दिया  था कि उनकी दुकानों से उन्हे कोई नहीं निकालेगा व रक्षा् मंत्रालय इस बाबत को कोई बीच का रास्ता निकालकर उन्हे राहत देगा। सांसद रतन लाल कटारिया ने इस बाबत बकायदा रक्षामंत्री को ज्ञापन भी दिया था। लेकिन सांसद के प्रयासों से परे सीबीए ने सोमवार को इन दुकानों पर अपना कब्जा कर लिया है।

आनंद मार्केट के दुकानदारों को भी दिया नोटिसभगत सिंह मार्केट में कार्रवाई के बाद दुकानदारों में जबरदस्त हड़कंप है। इसी तरह आंनद मार्केट के दुकानदारों की चिंता भी बढ़ गई है। क्योंकि इस बाजार में भी करीबन सोलह दुकानदारों को सीबीए दुकानों का कब्जा वापस किए जाने का नोटिस दे चुका है। दरअसल, इन दुकानों की लीज भी अपस्रैल 2015 में खत्म हो चुकी है और इन दुकानदारों को बाकायदा नोटिस जारी कर उन्हे दुकानों का कब्जा छोडने को कहा गया है। लेकिन सोमवार की कार्रवाई के बाद  इन दुकानदारों की टेंशन खासी बस गई है।
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