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एमसीए की कार्रवाई के विरोध में दुकानदारों का हंगामा

Sat, 16 Jan 2016 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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हाईकोर्ट के आदेशों पर म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) की टीम शुक्रवार को लाव लश्कर के साथ कैंट के कपड़ा मार्केट व हनुमान मार्केट में कब्जे तोड़ने के लिए पहुंची, लेकिन दुकानदारों ने न केवल बाजारों में हड़ताल कर बाजार बंद कर दिए, बल्कि कांग्रेस के पूर्व मंत्री एवं प्रदेश सचिव निर्मल सिंह, सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्रेय और इनेलो नेता ओंकार सिंह समेत अन्य कांग्रेस समर्थित पार्षद, पूर्व पार्षद व अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। उसके बाद सुबह से लेकर शाम तक बाजार में हंगामा हुआ। इसके बाद हड़ताल हुई और पालीटिकल ड्रामा भी हुआ।
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इस दौरान नेताओं की अफसरों से बहस भी हुई, जेसीबी मशीनें, कमांडों, होमगार्ड और पुलिस फोर्स बाजार में पूरा दिन खड़ी रही, जबरदस्त तनाव बना रहा, लेकिन शाम को एसडीएम ने स्पष्ट कर दिया कि बाजार में जो अवैध है, वो हर हालत में टूटेगा। एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह ने साफ कहा कि अफसरों को जवाब हाईकोर्ट में देना है, वहां अफसर फटकार नहीं खाएंगें, इसलिए इस तरह के हंगामे, धरने और हड़ताल का कोई मतलब नहीं है।
एसडीएम ने कहा कि दुकानदार हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करें और एमसीए अफसरों को पूरा सहयोग करते हुए दुकानों की पैमाइश करवाएं। एसडीएम ने दुकानदारों और वहां धरने पर बैठे नेताओं से कहा कि दस्तावेजों के मुताबिक जो दुकानदार वैध है, उसे छोड़ दिया जाएगा और जो दुकानदार अवैध रूप से नालों और सड़कों पर पक्का काबिज है, उसे हर हालत में तोड़ा जाएगा। एसडीएम शक्ति सिंह ने नेताओं और दुकानदारों से ये भी कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में बाधा डालना हाईकोर्ट की तौहीन है, इसलिए सभी दुकानदार एमसीए को पैमाइश करने में सहयोग करें, साथ ही नेतागण भी दुकानदारों को समझाकर पैमाइश का काम शुरू करवाएं। एसडीएम ने स्पष्ट कहा कि किसी दुकानदार के साथ नाजायज नहीं होगा, लेकिन अवैध कब्जा प्रशासन को भी बरदाश्त नहीं होगा। इतना कहकर एसडीएम ने तुरंत वहां मौजूद पुलिस, कमांडों और होमगार्ड फोर्स को मौके से हटने के आदेश दिए और दुकानदारों से अपील की कि वे खुद एमसीए की टीम के साथ मिलकर पैमाइश करवाएं। शाम को एसडीएम के तल्ख तेवर देखकर सुबह से राजनीति चमका रहे नेताओं की राजनीति भी ढीली हो गई, उन्होंने दुकानदारों से हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए अपनी दुकानों के कागजात एमसीए को दिखाते हुए पैमाइश करवाने की अपील की और वहां से चले गए। उसके बाद शाम को एमसीए ने पैमाइश शुरू की, जो शनिवार को भी जारी रहेगी।
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एमसीए कमिश्नर को लौटने पर किया मजबूर
कब्जे हटवाने के विरोध में दुकानदारों के हंगामे के बाद एमसीए कमिश्नर अजय तोमर मौके पर पहुंचे, लेकिन दुकानदार और नेतागण उन पर हावी हो गए। दुकानदार कुछेक दस्तावेज लेकर एमसीए कमिश्नर को दिखाने लगे और उन पर लगातार दबाव बनाने लगे। इस दौरान एमसीए कमिश्नर और दुकानदारों की बहस भी हुई। जबकि नेतागण भी कमिश्नर के सामने चौंक पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। मामला बिगड़ता देख एमसीए कमिश्नर तोमर को वहां से जाने पर मजबूर होना पड़ा। उनके जाने के बाद डीसी अंबाला अशोक सांगवान ने एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह को मौके पर भेजा।
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दुकानदारों और नेताओं को समझा दिया गया है कि इस तरह के विरोध से कोई फायदा नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश की हर हालत में प्रशासन की ओर से पालना होगा। सभी दुकानदार हंगामा करने की बजाए प्रशासन को सहयोग करें। हाईकोर्ट में प्रशासन ने इसी बाबत 21 जनवरी को देना है जवाब-
-कैप्टन शक्ति सिंह, एसडीएम अंबाला-
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पहले तो हर मसले पर दरी बिछाकर धरने देने लगता था, अब जब दुकानदारों की दुकानें टूटने लगी है तो मंत्री अनिल विज कहां गायब है। इस बाजार में इसलिए कार्रवाई हो रही है, क्योंकि यहां कांग्रेसी समर्थित ज्यादा है। हम हाईकोर्ट के आदेशों पालना करेंगे, लेकिन हम यह चाहते हैं कि प्रशासन दुकानदारों के दुकानों संबंधी दस्तावेज देखें, उनकी सुने, उसके बाद पैमाइश करें। सीधे जेसीबी लाकर बिना नोटिस दुकानें गिराना ये उचित नहीं है।
-निर्मल सिंह, पूर्व मंत्री एवं प्रदेश सचिव हरियाणा कांग्रेस-
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हाईकोर्ट में केस, कुछ कहना ठीक नहीं
मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में कुछ भी कहना उचित नहीं है। हाईकोर्ट के जो भी आदेश होंगे, प्रशासन उसकी समीक्षा करके हाईकोर्ट में जवाब देगा। जिला प्रशासन के अफसर इस केस में काम कर रहे हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना मतलब की राजनीति उचित नहीं।
-अनिल विज, के्बिनेट मंत्री, हरियाणा सरकार-
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नेताओं के खिलाफ प्रशासन ने क्यों नहीं की कार्रवाई
पांच साल हो गए हैं इस मामले को हाईकोर्ट में। इस जनहित याचिका में अब अवमानना याचिका भी लग चुकी है। हाईकोर्ट ने अफसरों से पूछा है कि आखिरकार अभी तक बाजारों में नालों व सड़कों से पक्के कब्जे क्यों नहीं हटे? अब इस मामले में जब हाईकोर्ट में तारीख नजदीक है, तो एमसीए कमिश्नर को कार्रवाई की याद आई है। सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में प्रशासन ने केस दर्ज क्यों नहीं करवाया। ये सबकुछ प्रशासन की मिलीभगत है।
-एडवोकेट एसकेएस बेदी, हाईकोर्ट में  जनहित डालने वाले याचीकर्ता-
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दुकानदार बोले, दशकों से बैठे हैं यहां
उधर, बाजारों के दुकानदारों का कहना है कि वे  यहां दशकों से बैठे हुए हैं और उनके पास उनकी दुकानों के कागजात भी है। उन्होंने कहा कि पहले प्रशासन के कहने पर उन्होंने कब्जे हटा लिए थे, लेकिन अब फिर से उन पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन कार्रवाई से पहले दुकानदारों की सुनवाई तो करे, उनके कागजात तो देखे, उसके बाद ही आगामी कार्रवाई करें।
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