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गिड़गिड़ाते रहे दुकानदार, चलता रहा पीला पंजा

Wed, 20 Jan 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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जिस कपड़ा-हनुमान मार्केट से पांच साल पहले अवैध कब्जों को हटवाने का विवाद शुरू हुआ और हाईकोर्ट तक पहुंचा, उस बाजार में अंतत: पांच साल बाद प्रशासन का पीला पंजा चल ही गया। इसी विवाद के चलते हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली गई, उसके बाद प्रशासन को अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन फिर भी इस बाजार में पक्के अवैध नहीं तोड़े गए। अब 21 जनवरी को इसी बाबत हाईकोर्ट में होने वाली पेशी से ठीक दो दिन पहले एमसीए (म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला) ने इस बाजार में 70 से ज्यादा दुकानदारों के पक्के कब्जों को ढहा दिया।
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इस कार्रवाई के दौरान जहां बाजारों में जबरदस्त हड़कंप का माहौल बना रहा, वहीं तीन दिन से ये बाजार पूरी तरह बंद था। इसी मसले को लेकर पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और मंत्री अनिल विज के बीच पूरी तरह ठनी हुई थी, लेकिन इस टकराव से अलग एमसीए ने बाजारों के पक्के कब्जों को ढहा दिया।
थम नहीं रहे थे आंसू, मंजर बन गया उजाड़
गत देर रात ही पुलिस की फोर्स तीन गाड़िय़ों में बुलाकर कैंट थाने में तैनात कर दी गई थी। कमांडों और होमगार्ड के जवान भी सुबह थाने पहुंच गए। उधर, एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह, एमसीए कमिश्नर अजय तोमर, एसीपी जगदीप दून, कैंट एसएचओ जसपाल सिंह समेत भारी फोर्स इस बाजार के पास ही कैंट थाने में तैयार हो गई। इस फोर्स को देखकर बाजार में दुकानदारों की बेचैनी बढ़ती गई। कपड़ा-हनुमान मार्केट के तमाम दुकानदारों ने मंगलवार को भी अपनी दुकानें बंद ही रखी, जबकि बहुत से दुकानदार तो अपने घरों में ही रहे। उधर, कोहरे के बावजूद भी अफसरों और पुलिस की टीम बाजारों में जेसीबी मशीनें लेकर पहुंच गई। जेसीबी मशीनें देखते ही अचानक बाजार में हल्ला मच गया और दुकानदार भी वहां पहुंचने लगे।
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इस दौरान अफसरों ने दुकानदारों से कहा कि उन्होंने नोटिस देने के बावजूद अपने पक्के कब्जे खुद नहीं हटाए, लिहाजा मजबूरन उन्हें अब कार्रवाई करनी पड़ेगी। इतना कहते ही अफसरों के आदेशों पर जेसीबी मशीनों ने ताबड़तोड़ ढंग से सड़कों व नालों पर करीबन 1977 से काबिज पंद्रह-पंद्रह फीट कब्जों को ढहाना शुरू कर दिया। जेसीबी मशीनों से कार्रवाई को देखकर घबराए दुकानदारों ने अफसरों के सामने गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया। दुकानदारों ने अफसरों से कहा कि वे जेसीबी मशीनों को तुरंत बंद करवाएं, वे खुद ही अपने कब्जे हटवाने का काम अभी शुरू कर रहे हैं, उन्होंने अफसरों को बताया कि जेसीबी मशीनों के प्रहार से उनका दुकानों में पड़ा माल भी बर्बाद हो रहा है।
इस दौरान दुकानदारों ने रोते, बिलखते हंगामा भी किया, लेकिन एसडीएम ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें समझाया कि ये कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है, इसलिए कोई इसका विरोध न करे। उसके बाद दुकानदार उजड़ती दुकानों के आगे खड़े होकर सिसकने लगे। दुकानदारों  की हालत देखकर एसडीएम ने जेसीबी मशीनों की कार्रवाई रुकवाई और उन्हें बाजारों से वापस भेजते हुए दुकानदारों को अल्टीमेटम दिया कि वे रात तक खुद ही पीछे बड़े नाले तक खुद ही पक्के कब्जे हटवा लें। बुधवार को यदि किसी का कब्जा शेष बचा तो फिर से जेसीबी मशीनें बाजारों में उसे गिराने पहुंच जाएगी। उसके बाद जेसीबी मशीनों तो बाजार से चली गई, लेकिन घबराए दुकानदार फटाफट अपनी दुकानों को खुद ही उजाड़ने में जुट गए। रात तक इस बाजार की स्थिति पूरी तरह से उजड़ी दिखाई दी।
दशकों बाद दिखा अंग्रेजों के जमाने का नाला
सन 1977 में सदर इलाका कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र से अलग हुआ और सदर क्षेत्र में नगर परिषद का गठन हुआ, दरअसल, तभी से इस अवैध कब्जों का जन्म हुआ। कपड़ा-हनुमान मार्केट बहुत खुली मार्केट हुआ करती थी, दोनों ओर अंग्रेजों के जमाने के बनाए गए बड़े-बड़े नाले हुआ करते थे, लेकिन नगर परिषद के तत्कालीन अफसरों की मिलीभगत के चलते यहां सड़क के दोनों ओर दुकानदारों ने धीरे-धीरे अपनी दुकानों को पहले नाले और फिर सड़कों पर पक्के ढंग से बढ़ाना शुरू किया। ये दुकानदार अपनी मूल दुकानों से दोनों ओर पंद्रह-पंद्रह फीट आगे आ गए। इतना ही नहीं दुकानदारों ने अंग्रेजों के जमाने के मूल नालेे को ही  कब्जों की आगोश में ले लिया और अपने पक्के शटर बाहर सड़कों पर लगा दिए।
बेदी बोले, अफसरों पर भी हो कार्रवाई
इसी मामले में हाईकोर्ट में वर्ष 2011 में जनहित याचिका डालने वाले एसकेएस बेदी ने कहा कि अफसर दरअसल इस बाजार को बचाना चाहते थे, क्योंकि यदि इस बाजार में आज दोनों ओर पंद्रह-पंद्रह फीट कब्जे हुए हैं, तो इसके पीछे अफसरों और कर्मचारियों की ही मिलीभगत थी। एडवोकेट बेदी ने कहा कि नगर परिषद के अफसरों व कर्मचारियों की यहां के दुकानदारों से सांठगांठ बनी रही और अफसरों के रहमो-करम पर ही ये दुकानदार धीरे-धीरे सड़कों पर पक्के ढंग से आगे बढ़ते गए। बेदी के अनुसार वे हाईकोर्ट में 21 जनवरी को अपनी रिपोर्ट देंगे और संबंधित कार्यकाल के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग करेंगे।
अफसरों में दिखा हाईकोर्ट में लताड़ का डर
इस तोडफ़ोड़ के दौरान दुकानदार बार-बार अफसरों के आगे हाथ जोड़कर उनकी दुकानें छोड़ने की गुजारिश करते रहे, लेकिन अफसर भी उन्हें दो टूक यही बात कहते दिखे कि मामला हाईकोर्ट का है, दो दिन बाद हाईकोर्ट में पेशी है, इस बार वे हाईकोर्ट में डांट नहीं खाना चाहते।
आज फिर होगी इसी मसले पर राजनीति
इस बाजार को बचाने के लिए पूर्वमंत्री निर्मल सिंह, उनके कांग्रेसी समर्थकों व कुछ इनेलो नेताओं ने दुकानदारों के साथ मिलकर अपनी राजनीति चमकाने का खूब प्रयास किया, लेकिन वे लोग उल्टे ही एफआईआर की जद में आ गए और उनपर एमसीए ने सरकारी काम में बाधा डालने और हाईकोर्ट के आदेश पर एमसीए की कार्रवाई का विरोध करने के आरोप में परचे दर्ज कर दिए। अब बुधवार को पूर्वमंत्री ने बाजारों में एमसीए अफसरों और सरकार के फैसले के खिलाफ जुलूस और धरने का आह्वान कर दिया है। पूर्व मंत्री ने कहा कि बुधवार को हजारों कांग्रेसी कार्यकर्ता कांग्रेस भवन से बाजारों में जुलूस निकालेंगे और फिर एमसीए कार्यालय के बाहर धरना देंगे। इसके बावजूद पुलिस ने रंजिशन दर्ज करवाई एफआईआर वापस नहीं ली, तो हजारों कांग्रेसी गिरफ्तारियां देंगे।
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22 जनवरी को हाईकोर्ट में इसी मसले पर एमसीए ने जवाब दाखिल करना है, इसलिए बाजारों में तोड़फोड़ की गई है। दुकानदारों को कई बार नोटिस देकर खुद ही कब्जे तोड़ने को कहा गया था, लेकिन ये नहीं माने, इसलिए एमसीए को फोर्स के साथ एक्शन लेना पड़ा।
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-कैप्टन शक्ति सिंह, एसडीएम, अंबाला-
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