हाईकोर्ट के आदेश पर दुकानों को सील करने के मामले में रामनगर और पालिका विहार के दुकानदारों ने म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर धरना दिया। उन्होंने एमसीए अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने दुकानदारों को समझाया। लेकिन दुकानदारों ने काफी देर तक प्रदर्शन जारी रखा। उसके बाद कुछ दुकानदारों ने मेयर और एमसीए कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा।दुकानदारों का कहना है कि इस मामले को लेकर वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। ताकि रिश्वत लेकर काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को एमसीए ने हाईकोर्ट के आदेश पर इन दुकानदारों की दुकानें इसलिए सील कर दी थी कि ये दुकानों रिहायशी कालोनी में चल रही है, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
बिना नोटिस थमाए की कार्रवाईदुकानों के सील होने से निराश दुकानदार एमसीए कार्यालय के गेट के बाहर दरी बिछाकर बैठ गए। जिसमें कई महिलाएं भी शामिल रही। दुकानदारों ने अफसरों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि दुकानदारों को बिना नोटिस थमाए ही एमसीए अधिकारियों ने पुलिस दल के कार्रवाई की है। जिससे दुकानदारों की रोजी-रोटी छिन गई है। दुकानदारों का आरोप है कि पहले तो पैसे लेकर उनके नक्शे पास किए गए और बाद में एरिया कामर्शियल बताकर उनकी दुकानों को सील कर दिया।दुकानदार ओंकार सिंह ने कहा कि एमसीए अधिकारियों ने उनका शटर नहीं तोड़ने की एवज में पैसों की मांग की। जबकि 2002 में एमसीए ने खुद ही नक्शे पास किए थे। पिछले करीब पंद्रह साल से ब्यूटी पार्लर चला रही स्वीटी आहुजा ने कहा कि उनका पार्लर करीब पिछले 15 साल से चल रहा है। 2009 में कामर्शियल दुकान के लिए अप्लाई किया था। मगर नक्शा पास नहीं किया। इसकी एवज में 39000 रुपए भी ऐंठ लिए। उधर, हरविंद्र सिंह का आरोप है कि दुकानें सीलिंग को लेकर हाईकोर्ट में अपील दाखिल करेंगे। एमसीए अधिकारियों ने बिना नोटिस दिए दुकानें सील कर दी। सुरेंद्र ढींगरा का कहना था कि इस मामले में हाईकोर्ट में अपील दायर करने के साथ ही आरटीआई मांगी जाएगी।