अंबाला सिटी। हाउसिंग बोर्ड कालोनी सेक्टर-नौ के श्री वृंदावन भक्ति धाम में पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में चल रही शिवपुराण की कथा में डॉ. अनुभवानंद गिरी महाराज वेदांताचार्य ने भगवद्द प्राप्ति का शीघ्र उपाय बताते हुए कहा कि भगवान शिव साध्य भी हैं और साधन भी हैं। उन्होंने कहा कि श्रवण, कीर्तन और मनन भगवद् प्राप्ति के शीघ्र एवं उत्तम साधन हैं। इन साधनों से जीव शिव तत्व को प्राप्त कर सकता है। अप्रत्यक्ष वस्तु को प्राप्त करने का साधन श्रवण है इसी प्रकार वाणी से कीर्तन और चित्त से मनन साध्य शिव तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। शिव तत्व के स्वरूप को बताते हुए स्वामी अनुभवानंद ने कहा कि शिव के दो स्वरूप हैं सकल मूर्ति रूप और निश्चल लिंग रूप। भगवान शिव की दोनों रूपों की पूजा होती है। मूर्ति की अपेक्षा लिंग की पूजा से अधिक फल प्राप्त होता है और बड़े-बड़े पापों की निवृति हो जाती है। भगवान शिव भोले भंडारी हैं। वह शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
विशेषकर श्रावण मास में भगवान शिव के निमित्त की गई पूजा अर्चना, जप-पाठ से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री वृंदावन भक्ति धाम के नवदीप डांग ने बताया कि श्री वृंदावन भक्ति धाम में पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में सांय 4 से 6 बजे तक शिव महापुराण की कथा चल रही है और श्रावण के प्रत्येक सोमवार को प्रात काल की बेला में शिवार्चन भी किया जाएगा।
्र
फोटो नंबर -36 व 37
भक्ति से ही प्रभु को पा सकता है इंसान
नारायणगढ़। गांव की सुख शांति के लिए गांव धनाना में ग्रामीणों द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री मद्भागवत कथा के तीसरे दिन वृंदावन से आए कथावाचक श्री रमणीक कृष्ण शास्त्री ने भक्ति और ज्ञान बारे चर्चा करते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि भक्ति दो रूपों में की जाती है एक सगुण भक्ति रूप दूसरा निर्गुण भक्ति रूप।
दोनों प्रकार की भक्ति से मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सगुण भक्ति रूप में हम परमात्मा की मूर्ति द्वारा भगवान को प्राप्त करते है और निर्गुण रूप भक्ति के द्वारा बिना मूर्ति के हम परमात्मा का अपने व दूसरों के अंदर अनुभव कर भक्ति करके प्राप्त कर सकते हैं।
कथावचक रमणीक कृष्ण शास्त्री ने ज्ञान के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि सत्य ज्ञान अनंत ब्रह्म अर्थात इस संसार में जो परमात्मा रूप सत्य विद्यमान है वही ज्ञान है वही सत्य है। सारा संसार मिथ्या है यहां सब एक दूसरे के साथ स्वार्थ के वशीभूत होकर जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह सारा संसार एक भ्रम के समान है। जैसे अंधेरे में हमारे सामने कोई रस्सी पड़ी हो तो वह सांप दिखाई देती है। इसी प्रकार हमें यह सारा संसार मिथ्या होते हुए भी वास्तविक दिखाई देता है। कथा के दौरान वामन भगवान की झांकी प्रस्तुत की गई।