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सर्विस क्लास के हाथ खाली, युवाओं के चेहरे खिले

Tue, 18 Feb 2014 12:05 AM IST
अमर उजाला अंबाला
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अंबाला। केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से सोमवार को संसद में पेश अंतरिम बजट पर अंबाला में मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। सर्विस क्लास ने जहां से अपने लिए रूखा बजट करार दिया, वहीं युवाओं को शिक्षा लोन का तोहफा मिला। आयकर सीमा में छूट की घोषणा नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा है। महिलाओं ने निर्भया फंड की राशि को नाकाफी बताया है।  
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उच्च शिक्षा का रास्ता खुलेगा
‘शिक्षा लोन में जिस तरह से राहत दी गई है, उससे वे विद्यार्थी भी शिक्षा लोन के लिए आगे आ सकेंगे, जो अभी तक ब्याज के कारण नहीं ले रहे थे। ऋण अदायगी थोड़ी आसान होने के कारण कमजोर वर्गों के लोगाें को कम से कम उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए रास्ता तो खुलेगा।’
- डा. विकास कोहली, प्रिंसिपल

विद्यार्थियों को होगी राहत
‘बजट में शिक्षा लोन में राहत दी गई है, जो एक बेहतर कदम है। ब्याज में दी गई राहत से कम से कम ऋण वापसी का रास्ता को आसान होगा। अभी तक कई विद्यार्थी ऐसे थे, जो ब्याज के कारण शिक्षा लोन लेने से पीछे हट रहे थे। लेकिन अब कुछ राहत तो मिलेगी।’
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- अमित, विद्यार्थी
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मध्यम वर्ग के लिए कुछ भी नहीं
‘बजट में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए कुछ नहीं है, जबकि मध्यम कारोबारियों को खास राहत नहीं है। रिटेल सेक्टर में यदि कुछ राहत दी जाती, तो बेहतर था, लेकिन ऐसा कुछ खास नहीं मिला। रिटेल की कुछ वस्तुएं सस्ती हुई हैं, लेकिन दुकानदार को इसका फायदा नहीं मिलेगा, जबकि ग्राहक का फायदा रहेगा।’
- अमित गोयल, दुकानदार
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अंतरिम बजट से निराशा
‘छोटे व्यापारियों को कुछ उम्मीदें थीं, लेकिन वह पूरी नहीं हुईं। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं है, जिसकी मझोले कारोबारी इंतजार कर रहे थे। अब यह बजट तो उनको कुछ नहीं देकर गया है, जबकि उम्मीदें काफी थीं।’
- रविंदर गोयल, दुकानदार
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गाड़ी के सपने होंगे पूरे
‘एक्साइज ड्यूटी में कटौती से उद्योग जगत को कुछ राहत तो मिलेगी। इसका फायदा मार्केट में उपभोक्ताओं को भी दिखाई देगा। इस कटौती से आटोमोबाइल इंडस्ट्री को जिससे वाहन लोगों की पहुंच में होंगे। वाहन रखने के सपने भी लोगों के पूरे होंगे। यदि वैट पर भी इसी तरह कुछ घोषणा होती तो बेहतर था।’
- आदर्श अग्रवाल, उद्योगपति
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नौकरी के अवसर बढ़ेगे
‘उत्पादन क्षेत्र में नौकरियों के दरवाजे खुलेंगे। एक्साइज ड्यूटी कम होने से मांग बढ़ेगी, जबकि इसे पूरा करने के लिए मैन पावर भी चाहिए। इसके लिए युवाओं को नौकरी मिलेगी। अच्छा होता कि कुछ अन्य टैक्स स्लैब में बदलाव होता, तो अन्य उद्योग जगत को भी राहत मिलती।’
- अरविंद अग्रवाल, उद्योगपति
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बजट से कोई राहत नहीं
‘हमारा मुद्दा तो महंगाई को काबू में करने का है। सरकार ने विकास दर आदि पर अपने दावे तो रखे हैं, लेकिन हकीकत यही है कि महंगाई बेकाबू है। कीमतों को कंट्रोल कैसे करेंगे, कब तक रसोई को राहत मिलेगी। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर कीमतें बढ़ा दी जाती हैं। इस बजट में कोई राहत नहीं है, जबकि खतरा महंगाई से ही है।’
- मीनू रानी, गृहिणी
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महंगाई नियंत्रण के लिए कुछ भी नहीं
‘बिजली को लेकर दावा किया गया है कि उत्पादन पिछले दस सालों में दुगना हुआ है, लेकिन हालात तो आज भी वही हैं। यह सब कागजी बातें हैं और इसका असर हर परिवार को झेलना पड़ता है। सारी निर्भरता बिजली पर है, लेकिन शायद ही कोई ऐसा दिन जाता, हो, जिस दिन बिजली कट न लगे। दूसरी सबसे बड़ी चिंता महंगाई है, जिससे हर परिवार दुखी है।’
- सुदेश शर्मा, गृहणी
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निर्भया फंड की राशि नाकाफी
‘निर्भया फंड को मात्र 1000 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो नाकाफी हैं। भारत जैसे बड़े देश में, जहां आए दिन महिलाओं के साथ वारदात हो रही हैं, उसे देखते हुए यह फंड काफी कम है। बेहतर होता कि बजट में इसके साथ ही इनकी सुरक्षा पर भी कुछ रखा जाता। महिलाओं को सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है।’
- मीना रानी, गृहिणी
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बजट नहीं सिर्फ दावे
‘महिलाओं की सुरक्षा को लेकर इस बजट में कोई खास तैयारी नहीं है। सिर्फ निर्भया फंड में दी गई राशि ही नाकाफी है। महिला सशक्तीकरण को लेकर काम करना होगा, जबकि सरकार को इसके लिए अधिक बजट रखना चाहिए। इसी तरह हर परिवार जिस तरह से महंगाई से जूझ रहा है, उसके लिए कुछ करने की जरूर है, जबकि सरकार ने बजट में सिर्फ दावे ही रखे हैं।’
- सुनीता रानी, गृहिणी
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बजट स्वागतयोग्य
‘दोपहिया वाहनों सहित कारों को सस्ता किया गया है, जो बेहतर है। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों सहित उच्च वर्ग को भी राहत मिलेगी। वाहन रखने का सपना अब आसानी से पूरा हो सकेगा, जबकि इसकी डिमांड भी बढ़ेगी। नये वाहनों की पूर्ति के लिए उत्पादन ज्यादा करना होगा, जबकि इसके चलते रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। बजट में यह अच्छा कदम है।’
- गोपाल कृष्ण, युवा
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मोबाइल क्षेत्र में आएगी क्रांति
‘मोबाइल फोन सस्ते कर दिए गए हैं, यह वे मोबाइल होंगे, जो देश में ही बने हों। इससे देश की मोबाइल कंपनियों को एक मौका मिलेगा कि वे मल्टीनेशनल कंपनियों के मोबाइल का मुकाबला बेहतर तरीके से कर सकें, क्योंकि मोबाइल सस्ते होने से इनकी डिमांड भी बढ़ेगी। युवा वर्ग भी इन मोबाइल को हाथों हाथ ले सकता है, लेकिन इसके लिए देश की मोबाइल कंपनियों को क्वालिटी पर ध्यान देना होगा। यह मोबाइल क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।’
- शोभित अग्रवाल, युवा
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वन रैंक वन पेंशन के लिए फंड कम
‘वन रैंक वन पेंशन को लेकर फिलहाल संशय की स्थिति है। आगामी वित्त वर्ष के लिए जो 500 करोड़ रुपये का बजट इस मद के लिए रखा गया है, वह काफी कम दिखाई दे रहा है। अभी स्थिति साफ नहीं है कि यह वन रैंक वन पेंशन का ही या फिर कुछ और, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में स्थिति साफ हो सकती है, उसके बाद ही पता चलेगा कि सरकार ने इस पर क्या कदम उठाया है। पहले भी इसी तरह की घोषणाएं हुई हैं।’
- सेवानिवृत्त सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी, अंबाला कैंट
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रक्षा बजट में बढ़ोतरी सही
‘रक्षा बजट में दस फीसदी की बढ़ोतरी एक अच्छा कदम है। जिस तरह से देश के हालात हैं और हर ओर से चुनौतियां मिल रही हैं, उसे देखते हुए दस प्रतिशत रक्षा बजट बढ़ाना ठीक है। इससे देश की सेनाओं को बेहतर और आधुनिक उपकरण मिलेगी, जो देश की सीमाओं की रक्षा के लिए बेहतर होंगे। रक्षा बजट को लेकर कुछ और राशि बढ़ाई जाती, तो बेहतर था, क्योंकि अन्य देशों का रक्षा बजट हमारे से कहीं अधिक है।’
- सेवानिवृत्त कर्नल तीर्थराम काला, अंबाला कैंट
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खास वर्ग को खुश करने की कोशिश
‘सर्विस क्लास के लिए कुछ भी नहीं मिला है इस बजट में। न तो आयकर का स्लैब बढ़ाया गया है और न ही अन्य भत्तों में बढ़ोतरी का कोई प्रावधान किया गया है। सेवानिवृत्त और सेवारत कर्मियों को तो इस बजट ने निराश ही किया है, बकि इस अंतरिम बजट से उम्मीदें काफी अधिक थीं। एक तरह से इस बजट को कुछ खास वर्गों को खुश करने की कोशिश की गई है।’
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- पुरुषोत्तम शर्मा, रिटायर्ड कर्मी
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