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स्मार्ट कैंटोनमेंट का सपना, बदलेगा शहर अपना

Tue, 28 Jun 2016 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
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‌‌मि‌निस्‍ट्री
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अंबाला कैंटोनमेंट। अंबाला सिटी और अंबाला सदर इलाके से अलग बसा एक और शहर अंबाला कैंटोनमेंट अब काफी हद तक बदल जाएगा। ये शहर अपने आप में जहां पहले से ही खूबसूरत है, वहीं इसकी खूबसूरती अब और अधिक बढ़ जाएगी। क्योंकि यह शहर अब स्मार्ट बनने वाला है।
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मिनीस्ट्री ऑफ डिफेंस ने अंबाला कैंटोनमेंट को ‘स्मार्ट कैंटोनमेंट’ का दर्जा देने का फैसला कर लिया है। इसी को लेकर जहां लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के अफसरों से लेकर कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला के अफसर खासे उत्साहित है, वहीं कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) के सभी आठ वार्डों के पार्षदों ने भी अपने शहर की तस्वीर बदलने में पूर्ण सहयोग की लामबंदता दिखाई है।
कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला की सोमवार दोपहर बाद आयोजित सदन की बैठक में स्मार्ट कैंटोनमेंट का मुद्दा ही छाया रहा। अफसरों और पार्षदों ने जहां इस पर खुलकर चर्चा की, वहीं इससे संबंधित कुछेक विकास परियोजनाओं का खाका भी तैयार सदन में बतौर प्रस्ताव पेश किया गया। पार्षदों ने भी पूरे उत्साह से इन विकास परियोजनाओं को पास कर स्मार्ट कैंटोनमेंट की दिशा में एक कदम बढ़ा दिया।
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बैठक की अध्यक्षता सीबीए के प्रेसिडेंट एवं डिप्टी आर्मी कमांडर ब्रिगेडियर विजय सहगल ने की, जबकि मुख्य अधिशासी अधिकारी वरूण कालिया समेत अन्य सैन्य अफसर और बोर्ड के सभी पार्षद मौजूद रहे। सबसे पहले सीईओ वरुण कालिया व नोमिनेटिड सदस्य कर्नल जेजे राजगुरु ने पद व गोपनीयता की शपथ ली। क्योंकि दोनों अफसरों का अभी हाल ही में अंबाला कैंटोनमेंट में तबादला हुआ है और यह उनकी पहली सदन की बैठक थी। उसके बाद सदन की कार्रवाई शुरू की गई।

पहले दौर में कुछ इस तरह बदलेगा कैंटोनमेंट
- सड़कें बनेंगी चकाचक
अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में तमाम कच्ची सड़कों को जल्द पक्का करवाया जाएगा। सभी आठों वार्डों में कोई सड़क ऐसी नहीं रहेगी, जो कच्ची व उबड़-खाबड़ शेष होगी। इसके लिए जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी

- सजावटी पौधे बिखेरेंगे छटा
वैसे तो कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला अपनी हरियाली के लिए खासा माना जाता है। घने वट वृक्ष, अमलतास, आम, जामुन व अन्य तरह के  विशालकाय पेड़ों की संख्या यहां बहुत ज्यादा है। लेकिन स्मार्ट कैंटोनमेंट में अब सीबीए सजावटी पौधों की ओर बढ़ेगी। सड़कों के दोनों और ऐसे सजावटी पौधे लगाएं जाएंगे, जिसकी बदौलत माहौल मनोरम प्रतीत होगा। सजावटी पौधे लगाने और उसे छह माह तक मेनटेन करने का काम हालांकि ठेके पर दिया जाएगा, लेकिन छह माह बाद सीबीए की माली बिग्रेड इसे अपने हाथ में ले लेगी। सड़क किनारे लगे ये सजावटी पौधे यहां सैर करने वाले लोगों को सहज ही आकर्षित करेंगे।
- जनता तय करेगी सीबीए का नया लोगो, मिलेगा इनाम
कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) अपना नया लोगो भी तैयार करेगी। खास बात यह कि अपने इस नए लोगो (सिंबोलिक चिन्ह) को सीबीए अफसर जनता से तैयार करवाएंगे। सीईओ वरूण कालिया ने बताया कि इसके लिए अंबाला जिले के तमाम लोग आमंत्रित हैं। 25 दिनों में जिले का कोई भी व्यक्ति कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला का नया लोगो तैयार करके सीबीए कार्यालय में आवेदन के साथ जमा करवा सकता है। उसके बाद अफसर ज्यूरी लोगो पसंद करेगी और जिस व्यक्ति का लोगो चुना जाएगा, उसे न केवल 21  हजार का इनाम मिलेगा, बल्कि वही लोगो सीबीए का नया लोगो होगा, जिसे लांच कर दिया जाएगा।

- स्ट्रीट लाइटें होंगी एलईडी, खर्च बचेगा
स्मार्ट कैंटोनमेंट में अब स्ट्रीट लाइटों को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा। मौजूदा स्ट्रीट लाइटों को हटाकर उसकी जगह एलईडी लाइट्स लगाई जाएगी। यानी रात में कैंटोनमेंट जहां दूधिया रौशनी से नहाता हुआ प्रतीत होगा, वहीं स्ट्रीट लाइटों का बिल के रूप में होना वाला खर्च भी कम होगा।
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- जॉगिंग और साइकलिंग ट्रैक बनेंगे
सदर इलाके से बहुत से लोग यहां कैंटोनमेंट इलाके में सुबह व शाम सैर सपाटे के लिए आते हैं। खासकर माल रोड व स्टाफ रोड तो वॉकिंग प्लाजा भी बनाया हुआ है। लेकिन बहुत से लोग यहां जॉगिंग भी करते हैं। लेकिन सख्त सड़क पर जॉगिग करना उनके लिए उचित नहीं होता। इसलिए यहां अब सीबीए एक जागिंग ट्रैक भी बनवाएगा और इसी तरह साइकलिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा।
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सारे टैक्स ऑनलाइन जमा होंगे
स्मार्ट कैंटोनमेंट में एक खास बात यह रहेगी कि तमाम टैक्स ऑनलाइन ही जमा होंगे। जनता को यहां सीबीए कार्यालय में टैक्स भरने के लिए धक्के खाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने कंप्यूटर, टैब व मोबाइल से ही अपने सभी टैक्स अदा कर सकेंगे। इसके लिए बकायदा एक बैंक से टाइअप कर कैंटोनमेंट जनता के लिए ऑनलाइन पेमेंट गेटवे तैयार करवाएगी। उधर, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के भी ऑनलाइन आवेदन होंगे और ऑनलाइन ही तैयार होंगे।
-नालों की सफाई पर रहेगा बड़ा फोकस
स्मार्ट कैंटोनमेंट में नालों की सफाई और गंदे पानी को रि-साइकिल करने का भी इंतजाम किया जाएगा। कैंटोनमेंट का अनुमान है कि रोजाना बोर्ड क्षेत्र से लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है, जिसे रिसाइकिल कर विभिन्न कामों में इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके लिए सीवरेट ट्रीटमेंट प्लांट व अन्य प्लांट्स स्थापित किए जाने का भी प्लान तैयार किया जाएगा।
-वॉटर एटीएम से दूर होगी पेयजल किल्लत
स्मार्ट कैंटोनमेंट में वॉटर एटीएम लगाए जाने की भी योजना पर भी विचार हो रहा है। सीबीए क्षेत्र में कई इलाके ऐसे हैं, जहां पेयजल की किल्लत हैं, इसलिए यहां वॉटर एटीएम लगाए जाने की योजना है। ये मशीनरी फिल्टर वाटर उपलब्ध करवाएगी। ताकि लोगों को कम से कम पेयजल की किल्लत न हो। इस योजना का अभी खाका तैयार किया जाएगा।
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- लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरे
स्मार्ट कैंटोनमेंट की दिशा में पूरे क्षेत्रभर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने भी प्रस्तावित है। सीबीए अफसरों का मानना है कि इससे शहर में न केवल निगरानी रहेगी, बल्कि सेना, वायुसेना के लिए चौकसी भी और अधिक बढ़ जाएगी। क्योंकि अंबाला सैन्य क्षेत्र पहले ही अति संवेदनशील छावनियों में एक है। सीसीटीवी कैमरे भी नाइट विजिन के हाई टेक्रोलॉजी से लैस होंगे।
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- सीबी स्कूलों की भी बदलेगी सूरत
स्मार्ट कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीनस्थ तमाम स्कूलों की भी सूरत भी बदलेगी। यहां बच्चों को अपडेट करने के लिए कई तरह की एक्टिविटी करवाएं जाने की प्लानिंग है, तो स्कूलों को भी पढ़ाई के लिहाज से और अपग्रेड किया जाएगा। टीचरों का लर्निंग लेवर बढ़ाए जाने भी भी काम होगा।

-इलेक्ट्रानिक होगा दाह संस्कार
स्मार्ट कैंटोनमेंट की दिशा में पेड़ों की लकड़ियों का दोहन भी कम हो, इस पर भी विशेष ध्यान होगा। इसलिए यहां सीबीए के रामबाग में अब एक एडवांस ऐसी मशीन लगाई जाएगी, जिसमें दाह संस्कार इलेक्ट्रानिक रूप से किया जाएगा। इस बात के लिए किसी को दबाव नहीं दिया जाएगा। जो व्यक्ति दाह संस्कार लकडिय़ां जलाकर करना चाहते हैं, वे कर सकते हैं, लेकिन पेड़ों को बचाने के लिए अफसरों ने लोगों से अपील की कि वे इलेक्ट्रानिक तरीके से शव का दाह संस्कार करवाएं।
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पार्षद बोले जब मूलभूत सुविधाएं मिलेगी, तभी बनेगा कैंटोनमेंट स्मार्ट
सदन की बैठक में स्मार्ट कैंटेानमेंट का जो सपना संजोया गया, उसमें पार्षद भी पूरी जोश के साथ काम करेंगे। बोर्ड वाइस प्रेसिडेंट सुरेंद्र तिवारी, पार्षद वीरेंद्र गांधी, अजय बवेजा, लक्ष्मी देवी, आशिमा रानी, नीलम रानी, गरीब दास व राजू बाली ने सैन्य व सीबीए अफसरों को आश्वस्त किया कि पार्षद स्मार्ट कैंटोनमेंट में अपना पूरा सहयोग देें। लेकिन पार्षदों ने यह भी कहा कि इस दौरान शहर के चमकाने के साथ-साथ लोगों की मूलभूत सुविधाओं का खासा ध्यान रखा जाए। पार्षदों ने कहा कि जब लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलेगी, तभी सही मायनों में कैटोनमेंट स्मार्ट बनेगा। इसलिए सैन्य व सीबीए अफसर स्मार्ट कैंटेानमेंट के चक्कर में लोगों की मूलभूत सुविधाएं न भूल जाएं
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डिप्टी कमांडर ने सिखाए मोदी के मंत्र
सीबीए सदन की बैठक के अंत में सीबीए प्रेसिडेंट व डिप्टी आर्मी कमांडर बिग्रेडियर विजय सहगल ने पार्षदों को मोदी के कुछ मंत्र भी सिखाए। उन्होंने पार्षदों से आह्वान किया कि सभी अफसर व पार्षद सदन बैठक में पानी की बोतलों का सेवन छोड़ दें, सभी लोग साधारण गिलास में फिल्टर पानी लें, तो अच्छा होगा, क्योंकि बोतल सिस्टम से न केवल स्वच्छ पानी वेस्ट होता है, बल्कि बोतल से प्लास्टिक वेस्ट भी बढ़ता है। सभी पार्षदों व सैन्य अफसरों ने इस पर सहमति जताई। दूसरा, बिग्रेडियर सहगल ने ये भी आह्वान किया कि सैन्य क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति, अफसर व पार्षद विकलांग को विकलांग नहीं कहेगा, बल्कि दिव्यांग कहेगा।
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स्मार्ट कैंटोनमेंट का एक सपना जो अफसरों व पार्षदों ने संजोया है। इस पर कई प्रस्ताव है, कई विकास योजनाएं तैयार होंगे, सभी मिलकर काम करेंगे और अंबाला कैंटोनमेंट को सचमुच जनता के लिए स्मार्ट बनाएंगे।
- वरुण कालिया, मुख्य अधिशासी अधिकारी, सीबीए
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यह अंबाला के लिए एक बहुत बड़ी परियोजना है। स्मार्ट कैंटोनमेंट के लिए जो काम होगा, वो बहुत ही शानदार होगा। इसके लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है, फंड का एस्टीमेट्स भी लगाएं जा रहे हैं। जैसे-जैसे स्मार्ट कैंटोनमेंट  के लिए फंड आता रहेगा, उसी तरह से काम आगे बढ़ता रहेगा। लोगों से भी अपील है कि वे भी सीबीए को अपना पूरा सहयोग दें और अपने शहर को स्मार्ट बनाएं।
- बिग्रेडियर विजय सहगल, डिप्टी आर्मी कमांडर एवं प्रेजीडेंट सीबीए-
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बहुत पुराना है अंबाला कैंटोनमेंट
दरअसल, अंबाला कैंटोनमेंट देश की सबसे पुरानी छावनियों में से एक है। सन 1839 में अंग्रेजों ने यहां छावनी बसाई थी। करनाल में हैजा फैलने के बाद अंग्रेजों ने अपनी छावनी वहां से उठाई और पंजाब के सिरहंद शहर में शिफ्ट करने का फैसला लिया। करनाल से सिरहंद के बीच अंग्रेजों ने अपनी छावनी को एक रात अंबाला में पड़ाव के लिए ठहराया। लेकिन उसी समय अंग्रेजों को अंबाला की आबोहवा इतनी पसंद आई कि उन्होंने सिरहंद की बजाए अंबाला में ही अपना बेस कैंप स्थापित करने का फैसला लिया और यहीं छावनी बसा दी। सिरहंद की बतौर यादगार अंग्रेजों ने यहां सिरहंद के नाम से एक क्लब भी अंबाला में बनवा दिया। सैन्य क्षेत्र को अब डेवलप किया जाए, इसके लिए अंग्रेजों ने 1843 में कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला की स्थापना की। सन 1947 में भारत की आजादी के दौरान अंग्रेज अंबाला कैंटोनमेंट इंडियन आर्मी के हवाले कर चले गए। इसलिए अंबाला कैंटोनमेंट आज देश की सबसे बड़ी व अहम छावनियों में से एक है।
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