अंबाला। साइंस इंडस्ट्री को साल दर साल झटका लग रहा है। पहले ग्लासवेयर उत्पादों पर नए नियम सरकार ने लागू कर दिए। अब अधिक जीएसटी साइंस उद्योगों की मांग को कम कर रही है।
हालात ये हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार साइंस उत्पादों के 10 प्रतिशत ऑर्डर कम हो गए हैं। लगातार कम हो रहे ऑर्डर अब साइंस कारोबारियों के लिए चिंता का सबब बन चुके हैं।
इस पर कोई उनकी सुन भी नहीं रहा है। वह लगातार अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ सरकार के प्रतिनिधियों के पास जाते हैं मगर कोई कार्यवाही नहीं होती है। इस बार तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी उनका प्रतिनिधि मंडल मिला था मगर कोई समाधान नहीं निकला।
जीएसटी पांच प्रतिशत करने की मांग : अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्युफ्रैक्चर्स एसोसिएशन के महासचिव गौरव सोनी बताते हैं कि उनके संगठन ने कम से कम 10 बार सरकार के अलग-अलग प्रतिनिधियों और फोरमों पर अपनी मांग रख ली है, मगर कहीं से राहत नहीं मिली। वह सरकार से मांग कर रहे हैं कि साइंस उत्पाद पर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया जाए। अगर सरकार इस पर भी संतुष्ट नहीं है तो 12 प्रतिशत जीएसटी कर दे, मगर कोई भी ग्राहक 100 रुपये के उत्पाद पर 18 रुपये का टैक्स देना नहीं चाहता है। इसी कारण से पूर्व में बिना बिलिंग के मामले सामने आए। अब ऐसी परिस्थिति में साइंस कारोबारी क्या करे, उसे अपना घर चलाने के लिए ग्राहक की मांग के अनुरूप सामान बेचना होगा।
ज्यादा जीएसटी देने से कतराते हैं क्रेता : दरअसल, अंबाला की साइंस इंडस्ट्री प्रयोगशालाओं व शिक्षण संस्थानों में विज्ञान के प्रयोग में लाए जाने वाले उत्पादों को बनाती है। इसमें ग्लासवेयर उत्पाद भी शामिल होते हैं। कुछ समय पहले साइंस उत्पादों पर 18 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया। ऐसे में जो शिक्षण संस्थान साइंस उत्पाद बार-बार खरीदते थे वह जीएसटी अधिक होने के कारण अब सीमित खरीद करते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई शिक्षण संस्थान वर्ष में तीन बार साइंस उत्पाद खरीदता था तो अब वह एक बार में ही काम चला ले रहा है। इस कारण से ऑर्डर मिलने में उद्योग संचालकों को काफी दिक्कत हो रही है। संवाद