- चालक सीट बेल्ट लगा रहे न वर्दी पहन रहे, प्रशासन का नहीं ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सुबह सात से आठ बजे के बीच सड़कों पर स्कूली बसों की दौड़ शुरू हो जाती है। अभिभावक अपने बच्चों को इस भरोसे के साथ स्कूल बस में भेजते हैं कि वह सुरक्षित रहेंगे लेकिन हकीकत इससे परे है। चालक हाईवे और मुख्य सड़कों पर ही स्कूल बसें खड़ी कर रहे हैं जिससे हादसे का खतरा रहता है। वहीं बिना सीट बेल्ट और वर्दी के बसें चलाकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रशासन हमेशा से दावा करता रहा है कि स्कूलों के वाहनों को ठीक करा लिया है मगर नियम टूटते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं विभाग की कार्रवाई एक महीने में चार से पांच बसों के चालान तक सीमित है।
जरूरी नियम और हकीकत
1. बसों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य है।
हकीकत : अधिकांश पुरानी बसों में स्पीड गवर्नर नहीं। निर्धारित गति से अधिक रफ्तार से दौड़ रही हैं।
2. हर बस में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरा चालू हालत में होना चाहिए।
हकीकत : अधिकांश बसों में कैमरे सिर्फ शो-पीस, जीपीएस का अता-पता नहीं है।
3. स्कूल के भीतर चहारदिवारी में खड़ी हो रही बसें।
हकीकत : सरकारी हों या प्राइवेट अधिकांश स्कूलों के पास बसें तो हैं लेकिन हाईवे पर खड़ी कर रहे।
4. प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स व अग्निशमन यंत्र जरूरी।
हकीकत : अधिकांश बसों में न तो प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स है और न ही अग्निशमन यंत्र लगा है।
5. बसों में स्कूल सहित मार्ग व समय सारिणी का सूचना बोर्ड जरूरी।
हकीकत : बसों में स्कूल के नाम तो लिखे गए हैं लेकिन बस कौन से मार्ग से आवागमन करती है अंकित नहीं है।
6. वर्ष में एक बार चालक की सिविल सर्जन से स्वास्थ्य जांच जरूरी।
हकीकत : स्कूली बसों में तैनात अधिकांश चालक प्राइवेट डाक्टर के पास जाकर जांच करवाते हैं।
7. बस चालक को वर्दी और नेम प्लेट लगाना अनिवार्य।
हकीकत : अधिकांश बस चालक वर्दी में नजर आए लेकिन किसी की भी वर्दी पर नेम प्लेट नहीं थी।
फाइलों में सक्रिय परिवहन समिति
नियमों के मुताबिक हर स्कूल में एक परिवहन सुरक्षा समिति होनी चाहिए। इसमें अभिभावक, स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हों। पड़ताल में पता चला कि अधिकतर स्कूलों में समिति तो बनी है लेकिन उसकी बैठक साल में एक बार भी नहीं होती। समितियों में अभिभावकों को शामिल ही नहीं किया जाता ताकि स्कूल की कमियां उजागर न हों। शिक्षा विभाग ने कभी इन समितियों की सच्चाई जानने की कोशिश ही नहीं कि ये समितियां बनी भी हैं या नहीं। अगर बनी हैं तो कब और किस मुद्दे पर बैठक हुई और बैठक का एजेंडा क्या रहा।
हम समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को नोटिस जारी किए जाएंगे। बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।
- सुशील कुमार, आरटीए अंबाला
अंबाला छावनी में नेशनल हाइवे पर बिना सीट के स्कूल बस चलाता चालक। संवाद- फोटो : Samvad
अंबाला छावनी में नेशनल हाइवे पर बिना सीट के स्कूल बस चलाता चालक। संवाद- फोटो : Samvad
अंबाला छावनी में नेशनल हाइवे पर बिना सीट के स्कूल बस चलाता चालक। संवाद- फोटो : Samvad
अंबाला छावनी में नेशनल हाइवे पर बिना सीट के स्कूल बस चलाता चालक। संवाद- फोटो : Samvad