अंबाला सिटी। मुझसे मिलिए, मेरा नाम है गांव मोहड़ी। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर बसा हुआ हूं मैं। मुझमें 4800 लोग आशियाने बनाकर रह रहे हैं। मैं करीब 20 साल पहले नग्गल हलके में आता था, कुछ राजनीतिक कारणों के चलते मुझे मुलाना में डाल दिया गया जो मेरे से करीब 35 किलोमीटर दूर है। मुझे चिंता सताने लगी कि मेरे लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वह चीज अब देखने को भी मिल रही है। मेरे लोगों को किसी भी प्रकार की सुविधा प्राप्त नहीं है। यहां तालाबों में गंदे पानी की नालियां गिराई हुई हैं। इसके अलावा मेरे तालाब जलकुंभी से अटे पड़े हैं। इस कारण मैं खुलकर सांस भी नहीं ले पाता।
चुनाव के समय मेरे ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ता है क्योंकि मैं स्वयं अकेले अपनी ही जिम्मेदारी नहीं उठाता, बल्कि साथ लगते गोविंदगढ़ की जिम्मेदारी भी मेरे ही ऊपर है। इसमें 550 के करीब लोग रहते हैं, करीब 200 वोटर अच्छे नुमाइंदे का चुनाव करने में मेरा सहयोग करते हैं। दोनों गांवों के लोग एक सरपंच का चुनाव करते हैं। मेरा कहना है कि गोविंदगढ़ की पंचायत अलग होनी चाहिए लेकिन कुछ लोगों का यह मत भी है की एकता में बल है, इसीलिए दोनों गांवों की एकता बनाए रखने के लिए पंचायत भी एक ही रखनी चाहिए।
मैं सबसे ज्यादा दुखी गंदगी से हूं। मेरे आशियाने में बसी हुई को-ऑपरेटिव सोसायटी व दक्षिण दिशा की ओर लगने वाली फिरनी पर गंदगी फैली हुई है। मेरे आशियाने में बसने वाले कुछ लोग असुविधाओं के चलते शहर में रहने लगे हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या मेरी जड़ में चलता गुड़गुड़िया गंदा नाला है। इसके तेज बहाव के कारण कभी-कभी मैं स्वयं को निर्बल और असहाय महसूस करता हूं। हाल ही में हुई तेज बारिश के कारण इस नाले का पानी मेरे अंदर प्रवेश कर गया था।
गांव का इतिहास
मोहड़ी प्राचीन गांव है। यहां लगभग 600 वर्ष पूर्व पंजाब जिला अमृतसर के गांव सराली से आकर लोग बसे थे। यहां के बाशिंदे शुरू में जाट जाति के थे। इसके बाद विभिन्न मत पंथ व जाति के लोग इसमें रहने लग गए। अब यह विशाल गांव बन गया है। इस गांव का नाम मोड़ी इसलिए पड़ा क्योंकि जब पूर्व में लोग अमृतसर से यहां आकर बसे थे तो उन्होंने मोड़ी यानी किला गाड़ा था। गांव में प्रत्येक वर्ष नगर खेड़े का मेला लगता है जो गोवर्धन पूजा वाले दिन लगता है जिसमें दंगल का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा गांव में बाबा शीलनाथ और बाबा भगवान दास के बहुत प्राचीन डेरे हैं जिनकी गांव पर विशेष कृपा है।
खेल का मैदान खस्ताहाल
जजपा जिला महासचिव जरनैल सिंह ने बताया कि मॉडल संस्कृति स्कूल के खेल मैदान की हालत खस्ता है। विद्यार्थियों के स्वस्थ के लिए व्यायाम खेल मैदान में ही करवाए जाते हैं जो खस्ताहाल होने के कारण नहीं हो पाते। युवा लोग उससे अछूते रह जाते हैं। सरकार की ओर से कक्षाओं में डिजिटल सुविधाएं दी हुई हैं लेकिन इंतजाम अधूरे हैं।
योजना का लाभ दिलवाया
पूर्व सरपंच शरणजीत कौर ने बताया कि उन्होंने गांव का विकास करवाया। योग्य पात्र लोगों को सरकारी लाभदायक योजनाओं का लाभ दिलवाया लेकिन वर्तमान में वह अपने घर बार के कार्यों में व्यस्त रहती हैं। वह उम्मीद करती हैं कि भविष्य में मोहड़ी गांव को पढ़ा लिखा व अच्छी सोच समझ रखने वाला नुमाइंदा मिले।
गांव में फैली गंदगी
ग्रामीण निर्मल सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा हर जगह स्वच्छता को लेकर अभियान चलाए गए लेकिन उनका असर गांव पर नहीं पड़ा। कई जगह वह अपने स्तर पर सफाई करते हैं जिसमें गांव के कई युवा भी उनका साथ देते हैं। बड़ा गांव होने के कारण सफाई कर्मचारी से सफाई नहीं हो पाती। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
पानी निकासी की भारी समस्या
शहीद भगत सिंह यूनियन के राज्य प्रधान सरदार अमरजीत सिंह ने बताया कि उनका क्षेत्र रेड जोन घोषित किया हुआ है। गुड़गुड़िया नाले में सिंचाई विभाग व कृषि विभाग ने किसानों को कोई भी पाइपलाइन की ऐसी सुविधा नहीं दी गई है जिससे वह बारिश के समय में पानी की निकासी करके अपनी फसलों को बचा सके।
मैंने गृहिणी होते हुए भी जितनी हो सकी गांव की सेवा की। भविष्य में चाहूंगी की कि गांव को योग्य चेहरा मिले, ताकि गांव का विकास हो सके। वहीं अब मेरी चुनाव लड़ने की कोई इच्छा नहीं है।
कुलविंद्र कौर, निवर्तमान सरपंच