अंबाला। महाकुंभ में संगम तीर्थ स्थल त्रिवेणी से स्नान कर लौटे अंबाला के श्रद्धालुओं ने अनुभवों को साझा किया। इसमें इंद्रपुरी निवासी पंडित सतीश शांडिल्य ने बताया कि त्रिवेणी संगम पर स्नान से तन की शुद्धि, तिल आदि वस्तुओं के दान से धन की शुद्धि और पूजा, पाठ, जप, तप, ध्यान से मन की शुद्धि होती है।
इस कारण व्यक्ति का कायाकल्प होता है। दिव्य भव्य महाकुंभ का त्रिवेणी संगम क्षेत्र मानव जीवन के रूपांतरण को दर्शाता है, यहां पर आकर पूजा-पाठ कर एक व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को बदलकर अपनी वास्तविकता को बदल सकता है। त्रिवेणी संगम को नियमित स्नान के पानी में कुछ बूंदें डालकर स्नान करें, पूजा स्थल पर रखें, घर में सुख-समृद्धि के लिए इस्तेमाल करें।
त्रिवेणी संगम की मिट्टी भी है अहम
टैगोर नगर निवासी अजय जिंदल ने बताया कि त्रिवेणी संगम से लाई मिट्टी को घर के मुख्य द्वार पर या पूजा स्थल पर रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है । त्रिवेणी संगम की मिट्टी को बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस मिट्टी में सकारात्मक ऊर्जा होती है। ऐसा माना जाता है कि प्रयागराज में अमृत की कुछ बूंदें गिरी थीं। महाकुंभ की मिट्टी लाने से इंसान को सभी ग्रह दोषों से छुटकारा मिलता है।
जहां तीन नदियां मिले वह क्षेत्र त्रिवेणी
निर्मल विहार निवासी रामेश्वर बंस ने बताया कि गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा, सिंधु, शिप्रा, ब्रह्मपुत्र आदि सभी नदियों के अपने-अपने संगम है। त्रिवेणी का अर्थ है वह स्थान जहां तीन नदियां आकर मिलती हों। जहां तीन नदियों का संगम होता हो। प्रयाग की गंगा नदी में एक स्थान ऐसा है जहां तीन नदियों का मिलन होता है। इसलिए त्रिवेणी संगम तट पर ही स्नान करने का अपने आप में अनूठा अनुभव है।