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बार्डबंदी पर रार : मेयर ने वार्डबंदी समिति को बताया गैर संवैधानिक तो कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा

Sat, 08 Nov 2025 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव को लेकर होने वाली वार्डबंदी बैठक अधर में ही लटक गई है। पहले तो इस बैठक में मेयर को शामिल नहीं किया। वहीं वार्डबंदी करने को लेकर बनाई समिति पर ही अब सवाल उठने लगे हैं। इस समिति में सदस्यों के चयन पर आपत्ति जताते हुए मेयर शैलजा सचदेवा ने उपायुक्त को पत्र लिख दिया है और इसमें उन्होंने समिति को गैर संवैधानिक बताया है। इसके साथ स्थानीय निकाय विभाग के मुख्यालय को भी इस बाबत सूचित कर दिया गया है। वहीं मेयर के बाद कांग्रेस ने भी समिति में कांग्रेस पार्षद को शामिल न करने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बनाई गई समिति पर एतराज जताते हुए मुख्यालय को ई-मेल के माध्यम से अपनी आपत्ति जता दी है। आने वाली 14 जनवरी तक मेयर और पार्षदों का कार्यकाल खत्म होना है।
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वार्डबंदी समिति में सदस्य के तौर पर कांग्रेस पार्षद को भी किया जाए शामिल : अग्रवाल
अंबाला कांग्रेस शहरी अध्यक्ष पवन अग्रवाल डिंपी ने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग को ई-मेल के जरिए पत्र भेजा है कि वार्डबंदी समिति में कांग्रेस पार्षद को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। यह बैठक 3 नवंबर को होनी थी, लेकिन बैठक नहीं हो पाई। इस वार्डबंदी समिति में उपायुक्त, आयुक्त या उनके प्रतिनिधि, मेयर, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रतिनिधि और पांच मौजूद पार्षद होने जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि वार्डबंदी समिति में पार्षद अर्चना छिब्बर, हितेश जैन, मोनिका मल और दो नॉन एमसी रितेश गोयल व मनदीप राणा को शामिल किया गया था। इस समिति में नॉन एमसी सदस्य के तौर पर नहीं लिए जा सकते। ऐसा ही एक मुद्दा पंचकूला का चल रहा है। उन्होंने ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजा है ताकि कांग्रेस के पार्षद को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने पार्षद अधिवक्ता मिथुन वर्मा का नाम भेजा है। अग्रवाल ने बताया कि वह दो बार पार्षद रहे हैं और जब 2013 में निगम बना था, तब वह वार्डबंदी समिति में सदस्य थे।
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जब तक संवैधानिक समिति का गठन नहीं होता, तब तक किसी बैठक में नहीं लेंगी भाग : मेयर
नगर निगम मेयर शैलजा संदीप सचदेवा ने बताया कि जब तक संवैधानिक रूप से वार्डबंदी समिति का गठन नहीं हो जाता, तब वह किसी भी बैठक में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने उपायुक्त को चिट्ठी दे दी है और शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय में भी अधिकारियों को बता दिया है कि जब तक समिति की बैठक में गैर संवैधानिक सदस्य लिए जाएंगे, तब तक वह समिति की बैठक में भाग नहीं लेंगी।
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