अंबाला। जीएसटी की दर कम होने से फार्मास्युटिकल क्षेत्र को तो राहत मिल गई है, मगर अंबाला के साइंस कारोबारियों को अत्यधिक फायदा नहीं हुआ है। खासकर मरीजों की जांच में प्रयोग होने वाले मेडिकल उपकरणों पर 18 प्रतिशत जीएसटी कारोबारियों और खरीदारों दोनों को उलझा रही है। क्योंकि जीएसटी में कुछ मदों में स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रयोग होने वाली मशीनों पर राहत दी है मगर कई मशीनें ऐसी भी छूट गई हैं जिन पर अभी जीएसटी पोर्टल पर कोड नहीं आया है। ऐसे में खरीददार तो कहते हैं कि जीएसटी कम हो गया है, कम लगाओ मगर कारोबारी जब जीएसटी पोर्टल पर एंट्री करने जाते हैं तो उस उपकरण का उन्हें कोड ही नहीं मिलता है। ऐसे में कारोबारियों को संबंधित मेडिकल उपकरणों को लेकर काफी दिक्कत आ रही है। इन उपकरणों में मलमूत्र जांच की मशीन, रक्त जांच की मशीनें, माइक्रोस्कोप आदि शामिल हैं।
लाखों की मशीनों पर 5 प्रतिशत जीएसटी, छोटी पर 18 प्रतिशत
साइंटिफिक अपरेटर्स, मैन्युफेक्चरर एंड एक्सपोर्ट (सेम) के प्रधान अश्वनी नागपाल ने बताया कि सरकार ने जीएसटी में राहत देकर अच्छा काम किया है। मगर अंबाला के साइंस उपकरण बनाने वाले कारोबारी असमंजस में हैं। इसका प्रमुख कारण है कि बड़े मेडिकल उपकरणों पर तो 18 प्रतिशत से घटाकर जीएसटी 5 प्रतिशत कर दिया है मगर स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रयोग होने वाले छोटी जांच मशीनों पर अभी भी 18 प्रतिशत ही जीएसटी है। जीएसटी पोर्टल पर उनका नया कोड ही नहीं आ रहा। आमतौर पर अस्पतालों में रक्त की जांच, मलमूत्र की जांच आदि मशीनों का प्रमुख किया जाता है। वहीं माइक्रोस्कोप से बीमारी के बारे में पता लगाया जाता है। इन उत्पादों पर जीएसटी पांच प्रतिशत होना चाहिए। इससे इन उत्पादों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
लेबोरेटरी उत्पादों पर भी 18 प्रतिशत कर
शिक्षण संस्थानों पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बॉयोलोजी की लैब में अंबाला के बने साइंस उत्पाद जाते हैं। इन उत्पादों पर अभी भी 18 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि शिक्षण संस्थानों के नाते इन्हें 5 प्रतिशत जीएसटी स्लैब के दायरे में लाना चाहिए था। साइंस कारोबारी आलोक सूद ने बताया कि अगर इन उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी हो जाए तो शिक्षण संस्थानों के ऑर्डर में तेजी आ सकती है और अंबाला की इंडस्ट्रीज को काफी राहत मिलेगी।