- अब तक प्रतियोगिताओं में जीत चुकीं कई पदक
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, इस कहावत को सच कर दिखाया है छावनी के बब्याल निवासी रितिका ने। पिता की आर्थिक तंगी और खुराक की कमी रितिका के इरादों को डिगा नहीं सकी। आज रितिका न केवल एक नेशनल हैंडबॉल खिलाड़ी हैं, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अपने माता-पिता और अंबाला का नाम रोशन किया है।
रितिका के खेल की शुरुआत सातवीं कक्षा से हुई। सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान पीटीआई शिक्षक मीनू ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कोच संतोष धीमान के पास भेजा। यहीं से रितिका का हैंडबॉल के प्रति जुनून शुरू हुआ। पिता अशोक कुमार पेशे से सफाई कर्मी हैं, जिसके कारण खेल के लिए खुराक जुटा पाना एक बड़ी चुनौती थी। रितिका बताती हैं कि आर्थिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और 12 साल से लगातार मैदान पर पसीना बहा रही हैं।
रितिका ने 2024 में दादर नगर हवेली में आयोजित वूमेन सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया। इससे पहले वे जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में दो बार रजत पदक जीत चुकी हैं। स्कूल नेशनल स्तर पर भी उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त कर अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। अपनी सफलता का श्रेय वह कोच संतोष धीमान, कोच अशोक और रमनदीप जांगड़ा को देती हैं।
सनातन धर्म कॉलेज में करती हैं अभ्यास
रितिका के अनुसार वह सनातन धर्म कॉलेज से हिंदी में एमए कर रही हैं और वहीं अभ्यास भी करती हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर उनके छोटे भाई चहल और बहन प्रियंका भी बास्केटबॉल के खिलाड़ी बन चुके हैं। भाई ने सीनियर स्टेट में कांस्य पदक जीता है, तो वहीं बहन प्रियंका ने भी नेशनल स्तर पर कांस्य पदक हासिल कर अपनी पहचान बनाई है।