अंबाला। तोपखाना परेड के वासियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। चंडीगढ़ हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान स्थानीय निवासियों द्वारा लगाई गई याचिका को दस्तावेजों के आधार पर खारिज कर दिया गया है। ऐसे में अब तोपखाना परेड की बेशकीमती 21 एकड़ जमीन का कब्जा जल्द ही कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा लिया जाएगा। इस मामले से अब स्थानीय निवासियों की परेशानियां बढ़ गई हैं, ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि वो अब अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे। दूसरी तरफ अब कैंटोनमेंट बोर्ड पुलिस सुरक्षा के लिए पत्राचार करेगा ताकि जमीन पर तारबंदी की कार्यवाही को पूरा किया जा सके।
परिवार के भरण-पोषण की लगाई थी याचिका
तोपखाना परेड में जिस जगह का विवाद चल रहा है, उस जमीन से लगभग 30 हजार आबादी जुड़ी हुई है। इस जमीन पर खेतीबाड़ी करके और सब्जियां व फूल उगाकर लोग अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, ऐसे में अगर उनके हाथ से यह जमीन चली जाती है तो उनके लिए भूखा मरने की नौबत आ जाएगी क्योंकि यहां रहने वाले लोगों का मूल रोजगार खेतीबाड़ी ही है।
अंग्रेजों के समय से बसे हैं बसे
स्थानीय निवासी मनोज, अर्जुन दास, रिंकू, रेखा व रजनी आदि ने बताया कि उन्हें अंग्रेजों ने यहां बसाया था ताकि जमीन की देखभाल हो सके और लोग काम-धंधा कर सकें, लेकिन इस जमीन से अब लोगों को बेदखल किया जा रहा है जबकि उनकी तीन पीढि़यां लगातार इस जमीन से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अगर उनसे यह जगह छीनी जाती है तो फिर उनके लिए गुजर-बसर करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
24 जुलाई को पहुंची थी टीम
कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम तारबंदी के लिए 24 जुलाई को तोपखाना परेड़ में पहुंची थी। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। तोपखाना परेड वासियों की तरफ से एक वकील ने कोर्ट से संबंधित दस्तावेज बोर्ड अधिकारियों को दिखाए थे और कहा था कि इस मामले की सुनवाई एक अगस्त को हाईकोर्ट में है, इसके बाद बोर्ड अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से लिखित में आश्वासन लिया कि कोर्ट जो भी फैसला देगी, वो उन्हें मान्य होगा
यह है मामला
दो जुलाई को कैंटोनमेंट बोर्ड ने तोपखाना की लगभग 21 एकड़ पर कब्जा लिया था। इस जमीन पर वर्षों पहले अंग्रेजों ने श्रमिकों को बसाया था और उन्हें खेती के लिए यह जमीन दी थी। इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने अंग्रेजों के कार्यकाल के बाद अपने अधीन ले लिया और इसे स्थानीय निवासियों को छह हजार की लीज पर दे दिया गया, लेकिन धीरे-धीरे लीज की राशि को बढ़ाया गया जोकि 40 हजार प्रति एकड़ तक पहुंच गई जो खेतिहर मजूदरों के लिए चुकाना नामुमकिन हो गया, इसके बाद यह राशि 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस राशि की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने कोर्ट में याचिका दायर की और इसका फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया था।
तोपखाना परेड के निवासियों जो याचिका लगाई थी, उसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है, इसलिए अब जमीन पर कब्जा लेने की कार्यवाही आरंभ की जाएगी ताकि पुलिस की सुरक्षा में जमीन पर तारबंदी की जा सके।
- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला।