नई परिवहन नीति के तहत 3519 निजी रूट परमिट देने के विरोध में बुधवार को रोडवेज का पहिया पूरी तरह जाम रहा। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण अंबाला और नारायणगढ़ डिपो की 206 बसें सड़कों पर नहीं दौड़ीं।
इस कारण दैनिक यात्रियों और विद्यार्थियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल का अन्य विभागों ने भी साथ दिया और कामकाज ठप रखा। बसें नहीं चलने से प्राइवेट वाहन मालिकों की चांदी रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी कपाल मोचन मेले के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं ने उठाई।
हड़ताल के दौरान कैंट बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों व निजी बस चालक में हाथापाई तक हो गई। यह हड़ताल ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर की गई।
कर्मचारी यूनियनों का दावा है कि करीब आठ हजार कर्मचारी बुधवार को हड़ताल में शामिल हुए।
रोडवेज को बीस लाख का झटका
रोडवेज की बसें नहीं चलने के कारण रोडवेज को करीब बीस लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। हालांकि विभाग का कहना है कि अभी आंकलन किया जा रहा है।
दूसरा झटका कपाल मोचन मेले को लेकर लगा, जिसमें रोडवेज द्वारा विशेष बसें चलाई जाती हैं, लेकिन हड़ताल के कारण यह नहीं चलीं। दो दिनों तक इस कारण से भी रोडवेज को लाखों रुपये का नुकसान होगा।
भिड़े रोडवेज कर्मी व निजी बस चालक
कैंट बस स्टैंड पर उस समय स्थिति बिगड़ गई, जब रोडवेज कर्मचारी व निजी बस संचालक आपस में भिड़ गए। हुआ यूं कि हड़ताल के दौरान ही एक परिवहन समिति बस संचालक बस को कैंट बस स्टैंड के भीतर ले आया।
इसी पर रोडवेज कर्मचारी भड़क गए। रोडवेज कर्मचारियों ने विरोध जताया, तो समिति बस संचालक ने भी विरोध किया। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि जब परिवहन समिति की बसें भीतर नहीं लाई जा सकती, तो वह किस तरह से बस को भीतर लाया है।
इसी को लेकर दोनों में हाथापाई हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग किया और लालकुर्ती चौकी लेकर आए। यहां पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
भटकते रहे यात्री और विद्यार्थी
जिला में रोजाना करीब 30 हजार लोग जिला अंबाला में ही अप डाउन करते हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है। रोडवेज की आठ बसें भी कैंट के विभिन्न स्कूलों में ड्यूटी देती हैं, जबकि इन स्कूलों के विद्यार्थियों को लाने और ले जाने का काम इनके जिम्मे है।
इसके अलावा अन्य शिक्षण संस्थानों में जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 8 हजार है, जबकि अन्य दैनिक यात्री हैं, जो रोडवेज की बसों में सिर्फ जिला में ही सफर करते हैं।
यह सभी बुधवार को हुई हड़ताल के कारण परेशान रहे। इसके अलावा अन्य यात्रियों को अन्य राज्यों की बसों का सहारा लेना पड़ा, जिसके लिए काफी इंतजार करना पड़ा।
निजी वाहनों ने वसूला मनमाना किराया
हड़ताल के कारण निजी वाहन चालकों की जबरदस्त कमाई हुई। इन सभी ने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अच्छा खासा किराया वसूल किया।
इतना ही नहीं इन वाहन चालकों ने अंबाला से बाहर तक की सवारियों को मनमाने किराये पर बिठाया। मजबूरी में भी लोगों को यह किराया देना पड़ा। बस स्टैंड के आसपास इन वाहनों का जमावड़ा लगा रहा, जबकि अदर स्टेट की बसें न मिलने के कारण इन यात्रियों ने निजी वाहनों का सहारा लिया।
बसों को रोडवेज वर्कशाप में खड़ा किया
हड़ताल के चलते रोडवेज यूनियनों ने बसों को शहर स्थित रोडवेज वर्कशाप में ही खड़ा करके रखा। मंगलवार रात को ही इन बसों को वर्कशाप में ले आए। यहीं पर रात को कर्मचारी यूनियन के सदस्य हड़ताल पर बैठ गए और किसी भी बस को बाहर नहीं जाने दिया।
कैंट बस स्टैंड भी पूरी तरह सूना रहा, जबकि यात्री भी बस स्टैंड पर अन्य राज्यों की बसों का इंतजार करते दिखाई दिए।
ये विभाग हुए हड़ताल में शामिल
सिंचाई, जनस्वास्थ्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, ट्रेजरी, पशुपालन, पालीटेक्निक, कंप्यूटर प्रोफेशनल, पैक्स, वन मजदूर, पर्यटन विभाग, रोडवेज, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, डिप्लोमा वेटरिनरी एसोसिएशन, पब्लिक हेल्थ (मंत्री कोटा व पंचायत कोटे) के कर्मचारी, सर्व शिक्षा अभियान, आशा वर्कर, मिड डे मील वर्कर, एनआरएचम व अन्य परियोजनाओं में लगे सभी कच्चे व पक्के कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
धारा 144 रही बेअसर
हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 लागू की थी। इन आदेशों के तहत जिला में 5 से अधिक व्यक्तियों के इक्ट्ठा होने, किसी प्रकार आग्नेयास्त्र, तलवार, लाठी, बरछा, कुल्हाड़ी इत्यादि हथियार लेकर चलने पर सख्त पाबंदी रहेगी। यह आदेश 14 नवंबर तक जारी रहेंगे। लेकिन इस हड़ताल के दौरान ही यह निर्देश टूटते दिखाई दिए।
स्थिति का जायजा लेने के लिए जहां पुलिस बल तैनात किया गया, वहीं शहर में डीसीपी अर्बन विनोद कौशिक ने रोडवेज वर्कशाप का जायजा लिया।
‘हड़ताल पूरी तरह से कामयाब रही और 14 नवंबर को भी हड़ताल रहेगी। हजारों की संख्या में कर्मचारियों ने इसमें भाग लिया। सरकार को चाहिए कि वह इस ओर सोचे ताकि रोडवेज को भी नुकसान न हो।’
- इंद्र सिंह बधाना, जिला प्रधान हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन
‘हरियाणा प्रदेश में रोडवेज कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली हड़ताल के लिए पूर्ण रूप से हुडा सरकार जिम्मेदार है। सरकार द्वारा अपनी मांगों के प्रति अनदेखी होने से ही रोडवेज कर्मचारियों का रोष फूटा है और उन्होंने दो दिन की हड़ताल कर दी है। सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।’
- अनिल विज, भाजपा विधायक अंबाला छावनी
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