मुस्लिम परिवार में पैदा हुए साबरे आलम भले ही अपनी आंखों से नहीं देख सकता, लेकिन उसमें ज्ञान बटोरने की ललक इस कदर है कि मुस्लिम धर्म का होने के बावजूद उसके दिलोदिमाग में रामायण बसी हुई है। हिंदू धर्म के प्रति जानकारी जुटाने के लिए उसने पहले धर्म को जाना और उसके बाद ब्रेल लिपी के माध्यम से जानकारी जुटाने की ठान ली।
आलम इसी उम्मीद को लेकर दिनरात रामचरित मानस व रामायण पाठ का अध्ययन किया और आज रामायण व रामचरित मानस उसके दिलोदिमाग में बसी हुई है। ये जानकारी गोरखपुर जिला निवासी महाराजगोज साबरे आलम ने रविवार अग्रवाल धर्मशाला में दृष्टिहीनों की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीयस्तरीय ब्रेल राइटिंग प्रतिस्पर्धा के अंतिम दिन अमर उजाला से बातचीत में दी। कार्यक्रम में मौजूद साबरे आलम के पिता अलीराज ने बताया कि वह 11वीं कक्षा में पढ़ता है और पढ़ाई में होशियार होने के बावजूद सभी धर्मों के लोगों से लगाव रहता है।
सभी धर्मों की जानकारी जुटाना चाहता है
साबरे आलम का जुड़ाव सभी धर्मों से है। वह रामायण के साथ-साथ बाइबल व कुरान भी पढ़ना चाहता है। ताकि वह हर धर्म से संबंधित जानकारी जुटा सके। इसके लिए वह अपने पिता अलीराज के साथ मध्यप्रदेश में दृष्टिहीनों संस्था से संपर्क कर रहे हैं, ताकि वह ब्रेल लिपि में कुरान व बाइबल उपलब्ध करवा सके और उसे भी अपने दिलोदिमाग में बसा सके। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और साबरे आलम भले ही आंखें गवां चुका हो, लेकिन उसमें ज्ञान बटोरने की ललक बहुत है। इस कारण चारों बड़े भाई व बहन उसका साथ देते हैं और उसको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
मकसद धर्म में बंधना नहीं, केवल ज्ञान बटोरना
साबरे आलम का कहना है कि उसे शुरुआत में रिश्तेदारों से काफी रुकावट हुई, लेकिन उसका मकसद धर्म में बंधना नहीं है, बल्कि धर्म से ऊपर उठकर केवल ज्ञान प्राप्त करना है। ताकि वह जीवन में एक मिसाल कायम कर अपने परिवार का नाम रोशन कर सके। उसका कहना है कि वह गोरखपुर में दृष्टिहीनों द्वारा आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों में रामायण का पाठ कर चुका है और कई बार सम्मानित भी हो चुका है। उनका कहना है कि वह ज्ञान जुटाने के लिए प्रशासन से संपर्क कर गुहार लगा चुका है।