कोरोना काल में विदेशों से बेकार कागजों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण पेपर मिलें पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी हैं। वहीं महंगा और पर्याप्त माल न मिलने के कारण अंबाला में गत्ते के पैकिंग बॉक्स बनाने वाले कारोबारियों की भी कमर टूट गई है। यही कारण है कि अब अंबाला कैरोगेटिड बॉक्स एसोसिएशन के सदस्यों ने सर्वसम्मति से शनिवार यानी 19 दिसंबर को पूरी तरह से अपनी फैक्ट्रियों को बंद करने का फैसला लिया है। यह मीटिंग रामकिशन कॉलोनी स्थित वैलकन टैकर फैक्ट्री में हुई। जिसमें अंबाला छावनी, साहा व अंबाला शहर के कारोबारी पहुंचे।
कारोबारी आशीष, योगेश धही, राहुल धीमान, विक्की, दीपक कौशल आदि का कहना था कि अगर वह पैकिंग बॉक्स ही नहीं तैयार करेगी तो इसका असर अंबाला में बसी साइंस, मिक्की, मेडिकल और अन्य इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा। हालात इस लिए बिगड़ रहे हैं कि पेपर मिल तो करीब 50 प्रतिशत महंगा माल दे रहे हैं लेकिन आगे कंपनियों ने दाम बढ़ाने के मना कर दिया है। ऐसे में फैक्ट्री तो दूर घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बता दें कि कारोबारियों की सर्वसम्मति से बनाई अंबाला कैरोगेटिड बॉक्स एसोसिएशन में कुल 40 सदस्य है। -संवाद
इसलिए बिगड़ रहे हालात
प्रदेशभर की पेपर मिलों के अंदर बेकार कागजों की भारी कमी हो गई है। यहीं कारण है कि पेपर मिलों से रोल महंगे दामों पर मिलने का असर पेपर एंड पैकेजिंग इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों पर पड़ने लगा है। जल्द ही इसका असर आम जनता की रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं के दामों पर देखने को मिलेगा। बता दें कि अंबाला के अंदर पेपर एंड पैकेजिंग की बहुत बड़ी इंडस्ट्री है।
इसलिए है पैकिंग बॉक्स की भारी डिमांड
अंबाला में साइंस और मिक्सी के अलावा सैनिटाइजर इंडस्ट्री, साइंटिफिकेट गुड्स इंडस्ट्री, पैस्टीसाइड इंडस्ट्री, मेडिसन इंडस्ट्री, इलेक्ट्रानिक इंडस्ट्री आदि है। इसलिए यहां पर माल पैक करने के लिए गत्ते के डिब्बों की भारी डिमांड है। इन फैक्ट्रियों में माल यूपी, बद्दी, देहरादून, मुज्जफर नगर, मेरठ आदि से क्राफ्ट पेपर आता है। यहां आने के बाद उसे अलग-अलग लेयर के अंदर बांटा जाता है।
महंगाई की मार से गत्ते के बॉक्स बनाने का काम पूरी तरह से चौपट हो चुका है। पेपर मिल ने दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए है और सरकार लगातार अनदेखा कर रही है। कई कारोबारी तो घाटे के कारण अपनी फैक्ट्री तक हमेशा के लिए बंद कर चुके हैं। 19 दिसंबर यानी शनिवार को वह अपनी फैक्ट्रियां बंद रखेंगे ताकि सरकार उनकी ओर ध्यान दें।
-कनवल टंडन, प्रधान, अंबाला कैरोग्रेटिड बॉक्स एसोसिएशन