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अप्रैल में पूरा होगा प्रोजेक्ट, सरपट दौड़ेगें वाहन

Fri, 05 Feb 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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करीब ग्यारह बरस पहले शुरू हुए जालंधर से पानीपत तक नेशनल हाइवे नंबर एक को सिक्सलेनिंग करने का प्रोजेक्ट अब जल्द ही पूरा होने वाला है। सबकुछ अनुकूल रहा तो अप्रैल माह तक ये परियोजना पूरी तरह से सिरे चढ़ जाएगी। जिसके बाद न केवल इस हाइवे पर वाहन सरपट दौड़ेेंगे, बल्कि हादसे भी कम होंगे।
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नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किए गए इस प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद ये सामने आया है कि इस परियोजना पर नब्बे फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष बचा दस फीसदी काम भी कुछ ही शहरों में होना बाकी है, जबकि जालंधर से पानीपत के बीच पड़ने वाले अधिकतर शहरों में हाइवे की सिक्सलेनिंग और सर्विस लेन का काम पूरा हो चुका है। अप्रैल के अंत तक शेष काम भी पूरा हो जाएगा, जिसके बाद यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को बहुत ज्यादा राहत मिलेगी।
खतरनाक था हाइवे, खून से लाल होती थी सड़कें
जालंधर से पानीपत के बीच नेशनल हाइवे नंबर एक का प्रोजेक्ट पर ग्यारह साल पहले काम शुरू हो गया था, लेकिन बीच में ये परियोजना कई कारणों से अधर में लटकती गई। अधर में लटके इस सिक्सलेनिंग प्रोजेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, वहां भी कई साल तक केस  चला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका भी डाली गई। अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द से जल्द संबंधित ठेकेदार को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के आदेश दिए। नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया के अफसरों ने भी ठेकेदार पर प्रोजेक्ट को पूरा करने का दबाव बनाया। अब इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2016 के अंत तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
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इस प्रोजेक्ट के दौरान यदि स्थिति देखी जाए, तो ये हाइवे बहुत ही खतरनाक बना हुआ था। सड़कें व पुल अधूरे पड़े थे। लगातार हादसे हो रहे थे। चौपहिया वाहन, स्कूल बसें व अन्य बसें निर्माणाधीन हाइवे की सड़कों पर बेकाबू होकर पलट रही थी। जिसमें हजारों लोग घायल हुए और हजारों की मौत हुई। पिछले दस सालों में जालंधर से पानीपत इसी हाइवे पर चार हजार से ज्यादा लोगों की विभिन्न हादसों में मौत हो चुकी है। रात के समय तो ये अधूरा हाइवे बहुत ज्यादा खतरनाक बन जाता था, लेकिन अब इन हादसों में अपेक्षाकृत कमी आएगी।
ये थी परियोजना
नेशनल हाइवे नंबर वन पर जालंधर से पानीपत तक 291 किलोमीटर तक सिक्सलेन किया जाना था, साथ में दोनों ओर सर्विस लेन भी बननी थी। इस प्रोजेक्ट का खाका 2004-05 में तैयार किया गया था, उस वक्त इसकी लागत 2747 करोड़ रुपये रखी गई। 2006 में एनएचएआई ने इस परियोजना के टेंडर जारी किए खोले।  प्रोजेक्ट के तहत 120 फ्लाईओवर, 20 बड़े और 116 छोटे पुल बनाए जाने हैं। नवंबर 2011 तक ये काम पूरा होना था।
टेंडर प्रक्रिया लंबी चली
2009 में में इस ठेके को सोमा आइसोलेक्स कंपनी को दिया गया। 2009 तक इसकी लागत बढ़कर 4518 करोड़ पहुंच गई। ठेके के तहत इस हाइवे पर करनाल, अंबाला व साहनेवाल से पहले टोल प्लाजा लगाया जाएगा। ठेके के तहत टोल प्लाजा से होने वाली आय का 20 फीसद एनएचएआई को मिलेगा और 80 फीसद ठेकेदार कंपनी को मिलेगा। कांट्रेक्ट के तहत 2009 से शुरू हुआ ये ठेका 15 साल वर्ष 2024 तक चलेगा।
इसलिए हुई लेटलतीफी
वर्ष 2013 की शुरुआत तक इस प्रोजेक्ट पर 3500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। बाद में ठेकेदार कंपनी ने घाटे का सौदा देते हुए करनाल और अंबाला टोल प्लाजा को शिफ्ट करने की मांग शुरू कर दी। ठेकेदार कंपनी इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। वहां भी इस विवाद पर सुनवाई चली और अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अंबाला, करनाल टोल को शिफ्ट करने की बात कहते हुए ठेकेदार को 31 मार्च 2015 तक काम पूरा करने के आदेश दिए, लेकिन अब एनएचएआई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर फिर से पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। अब सुप्रीम कोर्ट ने ठेकेदार को जल्द से जल्द परियोजना को पूरा करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद अब नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय के अफसरों ने इस परियोजना की समीक्षा कर इसे नब्बे फीसद पूरा पाया है। दावा किया गया है अप्रैल के अंत तक पूरा काम हो जाएगा।
अभी ये है स्थिति
नेशनल हाइवे अथॉरिटी के क्षेत्रीय कार्यालय के अफसरों द्वारा जो समीक्षा की गई है। उसके मुताबिक परियोजना पर नब्बे फीसदी काम पूरा हो चुका है। करनाल, अंबाला, लुधियाना, फगवाड़ा इलाके में महज थोड़ा ही काम बचा है। यहां दो फ्लाईओवर के काम पेंडिंग है। फगवाड़ा में एलीवेटिड कोरिडोर (जाम से बचने को लंबा फ्लाईओवर) की मांग है, इसलिए प्रोपोजल थोड़ा चेंज किया गया। लिहाजा परियोजना अप्रैल अंत तक पूरी होगी। दूसरा, अंबाला के पास मंत्री अनिल विज की डिमांड पर इस हाइवे पर अंडर ब्रिज की मांग की है। इसका प्रोपोजल केंद्र सरकार को भेजा गया है। उस पर बाद में काम होगा।
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नेशनल हाइवे नंबर एक पर पानीपत से जालंधर तक चल रही सिक्सलेनिंग परियोजना की समीक्षा की गई थी। इस पर नब्बे फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष काम भी तीन माह के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद हाइवे पर यातायात सुचारु हो जाएगा और हादसे भी कम होंगे। इससे वाहन चालकों को बहुत राहत मिलेगी।
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-विपिन शर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्ट, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया-
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