संवाद न्यूज एजेंसीअंबाला। लखनऊ में हुए भीषण हादसे के बाद भी अंबाला छावनी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अनधिकृत होटलों और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। हादसे के 23 दिन बीत जाने के बाद भी नगर परिषद की ओर से शुरू की गई जांच अधूरी है। न तो अनधिकृत होटलों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच पूरी हो पाई है।
23 जून को लखनऊ में हुए हादसे में 15 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने छावनी क्षेत्र के कोचिंग सेंटरों और होटलों की जांच कर कार्रवाई करने का दावा किया था। इसके बाद भी अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच भी पूरी नहीं हो सकी है।
लोगों ने उठाए सवाल : स्थानीय नागरिकों गुरप्रीत, पंकज, सुरजीत, अनिल और मुकेश का कहना है कि नगर परिषद की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन जांच और कार्रवाई की बात तो करता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने से बचता है। लंबे समय तक जांच लंबित रहने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अवैध विज्ञापन पोल हटाने की प्रक्रिया भी अटकी
नगर परिषद की कार्रवाई केवल होटलों और कोचिंग सेंटरों तक ही सीमित नहीं है। छावनी क्षेत्र में लगे अवैध विज्ञापन पोल हटाने की प्रक्रिया भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। ये पोल जहां शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं सड़क किनारे लगे होने के कारण राहगीरों के लिए खतरा भी बने हुए हैं। इससे नगर परिषद को राजस्व का नुकसान होने की बात भी सामने आ रही है।
ऐसा नहीं है कि नगर परिषद अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती। समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। छावनी क्षेत्र में लगे अवैध विज्ञापन पोल और ट्यूशन व कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे। -स्वर्ण कौर, अध्यक्ष-नगर परिषद सदर अंबाला