संवाद न्यूज एजेंसी
बराड़ा। ग्रामीण अंचल में अगेती हाइब्रिड जीरी (धान) की आवक की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन अनाज मंडी की बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती किसानों व आढ़तियों के पसीने छुड़ा रही है। मंडी परिसर में अभी तक करीब 4 लाख कट्टे गेहूं का पुराना स्टॉक डंप पड़ा है। दूसरी ओर, मंडी में चल रहे सीवरेज और पाइपलाइन निर्माण कार्य के कारण सड़कें उखड़ी पड़ी हैं।
ऐसे में 15 से 20 सितंबर के बीच संभावित जीरी की आवक के दौरान मंडी में पैर रखने तक की जगह बचना मुश्किल लग रहा है। मंडी में जगह खाली कराने के लिए मार्केट कमेटी सचिव राहुल मेव ने उपायुक्त अंबाला, एसडीएम बराड़ा, एफसीआई, हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को कई रिमाइंडर भेजे हैं। सचिव राहुल का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है ताकि खरीद शुरू होने से पहले पर्याप्त जगह बनाई जा सके।
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अब तक राइस मिलरों का पंजीकरण नहीं
सीवरेज पाइपलाइन खुदाई के कारण सर्विस रोड समेत मुख्य रास्ते क्षतिग्रस्त हैं। इससे ट्रॉलियां खाली करना नामुमकिन हो गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग में अब तक न तो राइस मिलरों (सेलरों) का पंजीकरण हुआ है और न ही ट्रांसपोर्टेशन की निविदा जारी हुई है। मंडी के परचेज सेंटरों के लाइसेंस 30 सितंबर को खत्म हो रहे हैं, लेकिन रिन्यूअल के सरकारी आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं।
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किसानों ने चेताया, व्यवस्था न सुधरी तो होगा नुकसान
स्थानीय किसान सुभाष राणा, कुलदीप सिंह, राम सिंह, राहुल और सुरेंद्र प्रताप ने बताया कि कम अवधि वाली हाइब्रिड जीरी पककर तैयार है। यदि 15 से 20 सितंबर तक गेहूं का शत-प्रतिशत उठाव और मंडी की मरम्मत नहीं हुई, तो किसानों को अपनी उपज सड़कों पर फेंकने को मजबूर होना पड़ेगा।
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इस महीने बराड़ा सेंटर के लिए चार स्पेशल ट्रेनें आवंटित की गई हैं। मंडी और राइस मिलरों से लगभग 2 लाख कट्टे गेहूं उठाने की उम्मीद है। - राम फेरे, प्रबंधक, एफसीआई (बराड़ा)