महिला ने एंबुलेंस में दिया मृत बच्ची को जन्म, जच्चा नागरिक अस्पताल में उपचाराधीन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। ऊंचाहार एक्सप्रेस में सफर कर रही एक गर्भवती की रविवार शाम को अचानक तबीयत बिगड़ गई। ट्रेन में तैनात टीटीई ने तुरंत इसकी जानकारी रेलवे कंट्रोल पर दी। इसके बाद कैंट स्टेशन पर तैनात अधीक्षक ने इसकी जानकारी रेलवे अस्पताल में दी ताकि गर्भवती को उपचार मिल सके, लेकिन 25 मिनट बीत जाने के बाद रेलवे डाक्टर स्टेशन पर पहुंचे तो इस दौरान गर्भवती को लेकर रेल कर्मचारी परिसर में पहुंच गए थे। एंबुलेंस में जैसे ही गर्भवती को चढ़ाया गया वहीं उसकी डिलिवरी हो गई। नागरिक अस्पताल पहुंचते ही जब डाक्टरों ने जांच की तो बच्ची मृत मिली, इसके बाद गर्भवती को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
गर्भवती के पति करण ने बताया कि वो चंडीगढ़ में मेहनत-मजदूरी का काम करता है। रविवार को वह अपनी पत्नी काजल के साथ ट्रेन नंबर 14218 ऊंचाहार एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-7 में सीट नंबर 42 पर सफर कर रहे थे, उन्हें फाफामऊ तक जाना था। चंडीगढ़ से ट्रेन के चलने के बाद अचानक उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी, उनके पेट में सात माह का गर्भ था। इसके बाद उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया और ट्रेन में तैनात टीटीई से भी सहायता मांगी, लेकिन तब तक ट्रेन अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी थी। जब प्लेटफार्म पर कोई डाक्टर नहीं आया तो रेल कर्मचारियों ने उन्हें एंबुलेंस तक लेकर आए और यहां उन्हें एक महिला डाक्टर मिली। एंबुलेंस में ही बच्ची ने जन्म ले लिया था। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
5:20 पर अस्पताल में पहुंच गया था संदेश
ट्रेन में गर्भवती की सूचना मिलते ही उपचार का संदेश अंबाला कैंट के रेलवे अस्पताल में शाम 5:20 बजे पहुंच गया था जबकि ट्रेन शाम 5:35 बजे प्लेटफार्म दो पर आकर खड़ी हो गई थी। इसके बाद गर्भवती को कोच से प्लेटफार्म पर उतारकर स्ट्रेचर पर लिटाया गया। लेकिन चार मिनट बीतने के बाद भी जब डाक्टर नहीं पहुंचा तो ट्रेन को शाम 5:39 बजे गंतव्य की तरफ रवाना और गर्भवती को रेलवे परिसर में लाया गया, तब रेलवे अस्पताल से डाक्टर 5:45 बजे स्टेशन पर पहुंचे। गर्भवती को स्टेशन पर उपचार न मिलने का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी उपचार में देरी के कारण कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, हालांकि रेलवे ने इस समस्या के समाधान को लेकर स्टेशन पर डाक्टर का प्रबंध करने की योजना तैयार की थी और इसके लिए एक कमरे का निर्धारण भी किया था, लेकिन यह योजना मात्र कागजों तक ही सिमट कर रह गई।
मामला संज्ञान में आया था। यह प्रसव का मामला था और इसका उपचार स्टेशन पर संभव नहीं था,इसलिए गर्भवती महिला को छावनी के नागरिक अस्पताल भेज दिया गया था। बच्ची की मौत की जानकारी नहीं है। अगर इस मामले में कोई लापरवाही मिली तो नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
- एनके झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल