सौतेली मां द्वारा 10 हजार 400 रुपये लेकर प्रेमी संग भेजी 17 साल की नाबालिग जैसे ही बच्चे को जन्म देगी इस दौरान वह 18 वर्ष की हो जाएगी। नाबालिग 5 नवंबर 2019 को 5 महीने की गर्भवती है। अलबत्ता उसकी डिलीवरी को अभी 4 माह शेष हैं। इसी अवधि में किशोरी का 18वां जन्मदिन आ जाएगा। मसलन अब किशोर उम्र में दुष्कर्म पीड़िता बालिग होकर बच्चे को जन्म देगी। नाबालिग के बालिग होते ही बहुत सी परिस्थितियां फिर से बदल जाएंगी। ऐसे में बच्चे के जन्म के बाद अपने पिता का नाम मिलना भी संभव है जोकि इस समय जेल में पोक्सो के मामले में बंद है। वहीं जांच कमेटी की रिपोर्ट का अब भी इंतजार है। इस मामले में लापरवाही बरतने पर जिला अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
बालिग होकर डाल सकती है क्वैशिंग याचिका
बालिग होने के बाद पोक्सो में जेल में बंद अपने प्रेमी आरोपी युवक को छुड़ाने के लिए पीड़िता हाईकोर्ट में क्वैशिंग याचिका डाल सकती है। क्वैशिंग के जरिए वह आरोपी पर दर्ज हुए केस को निरस्त करने की मांग कर सकती है। यदि पीड़िता के पिता अपनी बेटी और नवजात के भविष्य को देखते हुए खुद केस वापस ले लें तो भी बालिग होने पर आरोपी युवक को पुलिस छोड़ सकती है। दोनों ही स्थितियों में नवजात को अपना पिता और पीड़िता को पति मिल जाएगा। लेकिन पिता की असहमति होने पर पीड़िता को उसे छुड़ाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। बता दें कि नाबालिग ने जांच कमेटी को दिया बयानों में कहा है कि वह अपनी प्रेमी के साथ रहना चाहती है और मर्जी से ही उसके साथ रह रही थी।
12 अप्रैल को दोनों ने की थी शादी
पीड़िता ने जांच कमेटी को अपने बयानों में यह भी बताया है कि उसने अपने प्रेमी के साथ कानपुर में 12 अप्रैल 2019 को शादी की थी। लेकिन यह कानूनी मान्य नहीं है। क्योंकि शादी के समय वह 17 साल की थी। बता दें कि 5 नवंबर को पीड़िता 5 माह की गर्भवती हो चुकी है।
कोई कागजी कार्रवाई नहीं की पूरी
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी पाया है कि सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता को उसकी सौतेली मौसी के सुपुर्द करने से पहले किसी भी प्रकार की कागजी या कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की। ऐसे में जांच कमेटी इस मामले में सीडब्ल्यूसी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी कर सकती है। हालांकि सीडब्ल्यूसी सदस्य रेखा शर्मा पहले ही बता चुकी हैं कि नाबालिग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उसे उसकी सौतेली मौसी के सुपुर्द किया था।
नाबालिग के बालिग होने के बाद वह क्वैशिंग याचिका दायर कर सकती है। यदि उसके पिता चाहें तो अपनी बेटी और होने वाले बच्चे के भविष्य को देखकर केस वापस भी ले सकते हैं। ऐसे में क्वैशिंग याचिका भी दायर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि लड़की और उसके पिता दोनों की सहमति हो तो केस रद्द किया जा सकता है।
-कुलदीप सिंह, सदस्य एशिया पैसिफिक काउंसिल फॉर जुवेनाइल जस्टिस