फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्विन सिटी के 20 किलोमीटर के दायरे में 400 कैंसर के मरीज, ओपीडी में रोजाना पहुंचे रहे 25 मरीज

विज्ञापन
विज्ञापन
जानलेवा कैंसर ग्रामीण के साथ-साथ अब शहरी क्षेत्र में फैल रहा है। जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या जहां 14 सौ पार कर चुकी है तो वहीं अंबाला छावनी और शहर की 20 किलोमीटर की आबादी में मरीजों की संख्या 400 से अधिक है जो कि जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। छावनी के नागरिक अस्पताल में चल रही कैंसर ओपीडी में मरीजों की बात करें तो रोजाना 20 से 25 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें से ऐसे मरीज भी हैं जो पीजीआई चंडीगढ़ इलाज के बाद यहां पर डाक्टरों की देखरेख में अपना इलाज करा रहे हैं।
विज्ञापन

बीते वर्ष जब कैंसर के मरीजों की स्क्रीनिंग की गई तो सामने आया था कि ग्रामीण क्षेत्र में मारकंडा नदी का केमिकलयुक्त पानी इसके लिए जिम्मेदार है। फरवरी 2018 में जब जिला विकास समन्वयक एवं निगरानी समिति की बैठक हुई थी तो सांसद रतनलाल कटारिया को तत्कालीन सीएमओ डा. विनोद गुप्ता ने जवाब दिया था कि मारकंडा नदी में फैक्ट्री का केमिकल बह कर आता है। उस समय जिले में 1100 कैंसर मरीजों के पंजीकरण की बात कही गई थी। डॉ. गुप्ता ने बताया था कि आसपास के किसान इस पानी से फसल और सब्जियों की सिंचाई करते हैं। इसीलिए स्किन कैंसर समेत अन्य कैंसर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हो रहे हैं।
अगले साल से कैंसर के मरीजों को छावनी में ही मिलेगा इलाज
नागरिक अस्पताल छावनी में 60 करोड़ की लागत से 50 बैड का नया कैंसर केयर एवं टर्सरी सेंटर अस्पताल का निर्माण हो रहा है। निर्माण कार्य जुलाई 2018 में शुरू हुआ था जो अगले साल तक पूरा हो जाएगा। अभी 90 प्रतिशत तक का काम पूरा हो चुका है। कैंसर स्पेशलिस्ट डाक्टर विकास गुप्ता और डा. रोशनी की देखरेख में ओपीडी ब्लॉक में ओपीडी चल रही है और ट्रेनिंग के साथ-साथ उपकरण खरीदने का काम साथ-साथ चल रहा है। रेडियोथैरेपी तक मरीजों को मिल रही है। ऐसे में कैंसर के मरीजों को पूरे इलाज के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन

रोटरी की स्नेह स्पर्श रोगियों के लिए मददगार
रोटरी कैंसर एवं जनरल अस्पताल छावनी की बात करें तो ट्विन सिटी में फिलहाल यह एकमात्र कैंसर का अस्पताल है जो कैंसर के मरीजों का इलाज करता है और उन्हें-डोर-टू-डोर स्नेह स्पर्श योजना के तहत इलाज की सुविधा घर पर ही मुहैया करा रहा है। रोटरी अस्पताल के डाक्टरों का कहना है कि वह 20 किलोमीटर के दायरे में कैंसर के मरीजों का इलाज करते हैं और इस वक्त अस्पताल में करीब 400 कैंसर के मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि शहरी क्षेत्र में कैंसर मरीजों की बढ़ती तादाद जिला स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहा है।
करीब 15 मरीजों का उठाया खर्च
फेडरेशन ऑफ वेलफेयर एंड सोसाइटी के अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल सतनाम सिंह ने बताया कि रोटरी अस्पताल में आने वाले कैंसर के मरीज अपने इलाज का खर्च कई बार वहन नहीं कर पाते। इसीलिए अस्पताल की ओर से उन्हें इस बारे में बताया जाता है। फेडरेशन से जितनी मदद होती है वह की जा रही है। अभी तक करीब 15 कैंसर के मरीज वहां इलाज करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मरीज की एक कीमो पर खर्च 15 से 20 हजार के बीच का है। ऐसे में अस्पताल आधा पैसा अपने स्पर्श योजना के तहत कम कर देता है और बाकी मरीज की 50 प्रतिशत राशि में कुछ परिजन, फेडरेशन या समाजसेवी अपना योगदान दे देते हैं जिससे उसका इलाज चलता रहता है और उम्मीद यह रहती थी कि पैसे के अभाव में किसी भी मरीज का इलाज नहीं रुकना चाहिए।
कैंसर के मरीजों का नागरिक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है हम पीजीआई की तर्ज पर यहां रेडियोथैरेपी मरीजों की कर रह रहे हैं जो किसी प्राईवेट अस्पताल में नहीं होती। रोजाना करीब 25 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। कैंसर अस्पताल बनने के बाद पूरा इलाज मिलेगा। कैंसर के मरीजों के लिए कई तरह की योजनाएं अभी पाइपलाइन में है जो अस्पताल बनने के साथ ही पूरी होंगी।
विज्ञापन

- डा. सतीश, सीनियर मेडिकल ऑफिसर अंबाला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें