नारायणगढ़। धन-धन श्री गुरु हरिकृृष्ण साहिब की चरण स्पर्श धरती ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब 27 से 29 जुलाई तक प्रकाश पर्व मनाया जाएगा।
प्रकाश पर्व को लेकर गुरुद्वारा साहिब में तैयारियां शुरु हो गई हैं। गुरु साहिब कीरतपुर साहिब से दिल्ली जाते समय इस स्थान पर रुके थे। यह अंबाला-नारायणगढ़ मार्ग पर स्थित है।
इस गुरुद्वारा साहिब की इतनी मान्यता है जो भी संगत यहां नतमस्तक होती है, उसके सब दुख दूर होते हैं और उसे सुखों की प्राप्ति होती है। गुरु जी की कृपा से गूंगे भी यहां गुरु चरणों में नतमस्तक होकर बोलने लग जाते हैं। रोजाना हजारों की संख्या में संगत दूर-दूर से संगत यहां आकर नतमस्तक होती है।
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गूंगे व बहरे ने बोले थे गीता के श्लोक
गुरु साहिब जी कीरतपुर साहिब से चलकर दिल्ली के लिए रवाना हुए और कई स्थानों पर होते हुए गांव पंजोखरा साहिब पहुंचे, जहां भारी संख्या में संगत गुरु साहिब के दर्शनों के लिए पहुंची हुई थी। संगत में से किसी सिख को तेज बुखार हो गया और उसकी तबीयत खराब हो गई। गुरु साहिब ने वहां मौजूद एक छपड़ी में अपने चरण पाए और बीमार सिख को उस छपड़ी में स्नान करवाकर उसे ठीक किया और आज गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में वह छपड़ी सरोवर के रूप जाना जाता है।
बड़ी संख्या में संगत सरोवर में स्नान करके अपने दुख दर्द दूर करती है। इस स्थान पर गुरु जी के दर्शनों के लिए दूर-दूर से संगत आने लगी और धार्मिक दीवान सजने लगे। गुरु साहिब की महिमा का गुणगान सुनकर पंजोखरा साहिब का एक विद्वान पंडित लाल चंद दीवान में पहुंचा और गुरु साहिब की बाल उम्र को देखकर अहंकार से कहा कि द्वापर युग में श्री कृष्ण ने गीता उच्चारण की थी और आप गीता के श्लोकों के अर्थ करके बताओ।
गुरु साहिब कहने लगे कि असी अकाल पुरख दे सेवक हां ते कृपा भी अकाल पुरख की ही बरतती है। यदि आपने अकाल पुरख की कला देखनी है तो आप ही अपने गांव से किसी व्यक्ति को ले आओ। इसके बाद अहंकारी पंडित गांव के छज्जू झीवर नाम के गूंगे और बहरे व्यक्ति को लेकर आया और गुरु जी ने सिखों को हुक्म दिया कि इसको छपड़ी में स्नान करवाकर लाओ।
गुरु साहिब ने छज्जु पर मेहर की और अपनी छड़ी उसके सिर पर रखी तो छज्जु ने गीता के अर्थ करने शुरू कर दिए। वह बोलने लगे गया। इसे देखकर अहंकारी पंडित लाल चंद का अहंकार टूटा और वह गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुआ। उसी दिन से पंजोखरा साहिब की इतनी मान्यता है कि जो भी यहां नतमस्तक होकर अरदास करता है गुरु श्री हरि कृष्ण साहिब जी उन पर अपनी कृपा करते हैं।