फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डमी प्रत्याशी उतारने की जोड़तोड़ शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचायती चुनावों को लेकर गांवों में माहौल गरम होता जा रहा है, लेकिन शैक्षणिक योग्यता को लेकर चौधरियों की चौधराहट फंस सकती है। पेंच ऐसा है कि एक ओर जहां इसका विकल्प भी तैयार करने में जुटे हुए हैं, वहीं विपक्षी भी इसी पर नजर रखें है कि आखिर ऐसे उम्मीदवार किनको चुनावी मैदान में उतारेंगे। कई दावेदार तो डमी यानी कठपुतली उम्मीदवार मैदान में लाने का प्रयास कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कई ऐसे प्रतिनिधि हैं, जो इस पेंच में फंस रहे हैं। इसी को लेकर पहली सीढ़ी पार करना ही इन चौधरियों के लिए मुश्किल हो रही है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सरपंच, पंच पद के उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता रखी है। अजा महिला उम्मीदवारों के लिए भी कम से कम पांचवीं तक की शिक्षा निर्धारित की है, जबकि पंच के लिए आठवीं और सरपंच के लिए दसवीं की योग्यता निर्धारित की गई है। अब इसी शैक्षणिक योग्यता में पेंच फंस रहा है, क्योंकि पंचायती चुनावों की पहली सीढ़ी पर मामला उन उम्मीदवारों के लिए लटकता दिख रहा है, जो इस पर खरे नहीं उतरते। अंबाला जिला के छह विकास खंडों में 408 पंचायतों का चुनाव किया जाना है। 
विज्ञापन

यह है पंचों व सरपंचों की संख्या इन में से अंबाला प्रथम विकास खंड में 101 पंचायतें है, जिनमें 756 पंचों का चुनाव होना है। इसी तरह अंबाला द्वितीय विकास खंड में 27 ग्राम पंचायतें है, जिनमें पंचों के 222 पद हैं। साहा विकास खंड में 60 सरपंचों और 507 पंचों का चयन होना है। बराड़ा विकास खंड 66 सरपंचों के साथ-साथ 563 पंचों का चुनाव होना है। इसी तरह शहजादपुर विकास खंड में 68 सरपंचों के अलावा 539 पंचों का चुनाव होना है, जबकि नारायणगढ़ विकास खंड में सरपंच के 86 पदों सहित 643 पंच चुने जाने हैं। 
चौधर कायम रखने की कशमकशशैक्षणिक योग्यता निर्धारित होने के बाद अब हर विकास खंड में ऐसे चौधरियों की चौधराहट को खतरा पैदा हो रहा है, जो शैक्षणिक योग्यता के मापदंड पर नहीं उतरते। अब यह लोग अपने परिवार या फिर निकट रिश्तेदारी में ऐसे उम्मीदवारों की तलाश में हैं, जो उनकी चौधराहट को कायम रख सके और चुनावों में चुनौती दे सके। इसके लिए सबसे पहले परिवार के ही किसी सदस्य को तैयार किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि अभी तक कई ऐसे जनप्रतिनिधि रहे, जो चुने तो गए, लेकिन उनके स्थान पर परिवार के सदस्य ही कामकाज करते आए हैं। अब यदि शिक्षा के आधार पर इन चौधरियों को उम्मीदवार नहीं मिलते, तो उनकी चौधराहट पर इस बार तो पूरी तरह से खतरा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें