एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा ने बताया था कि करनाल के कलंदरी गेट निवासी रमन उर्फ दीपा पहले दीपा कैटल की दवा फैक्टरी में काम करता था। साल 2020-21 में आरोपी पार्ट टाइम में किसी फैक्टरी से सैनिटाइजर लेकर बेचता था। जहां, सैनिटाइजर बनाए जा रहे थे, वहां आरोपी दीपा का संपर्क था। आरोपी वहीं से भारी मात्रा में इथेनॉल मंगाता था। दीपा के जरिए ही अंकित मोगली की कंबोपुरा की फैक्टरी के मालिक अंशुल के साथ संपर्क हुआ था। खरीदे गए ड्रम से ही मास्टरमाइंड शराब बनाता था। पुलिस आरोपी दीपा और अंकित को गहन जांच के लिए दोबारा कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लेगी।
पूछताछ में अंकित के जरिये ही पुलिस स्टीकर उपलब्ध करवाने वाले प्रिंटिंग प्रैस के मालिक दिल्ली के अशोक नगर निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग रविंद्र पाल उर्फ बबलू को काबू किया। हालांकि कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया। यह सभी आरोपियों में से सबसे बुजुर्ग था। मोटे मुनाफे के चक्कर में वह देसी शराब की बोतलों पर लगने वाले स्टीकर व उस पर लगे होलोग्राम को उपलब्ध करवाता था। जबकि रविंद्र की एक टांग बीमारी के चलते काफी खराब हालत में थी। ऐसे में मजबूरन एसपी कार्यालय में उसे मुलाजिमों द्वारा उठाने के बाद एसपी कक्ष तक पहुंचाया गया था।
अंकित उर्फ मोगली ने बताया कि उसने सोशल मीडिया के जरिए ही देसी शराब बनाना सीखा था। घंटों वीडियो देखने के बाद वह इसे बनाने लगा था। पहले तो एक-दो बोतल बनाई थी। वो ठीक बनने के बाद उसने फैक्टरी लगाई थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया था कि अंकित उर्फ मोगली द्वारा अवैध रूप से साहा क्षेत्र में चलाई जा रही शराब फैक्टरी को पकड़ा था। अंकित पर अभी तक कुल 10 मुकदमें दर्ज है। यह मुकदमें 2020 में हिमाचल कालाआंब थाना, 2022 में शहजादुपर थाना, 2018 में जगाधरी थाना, 2021 में साहा थाना, 2023 में मुलाना थाना, 2023 में शाहाबाद थाना, 2019 में बलदेव नगर थाना में दर्ज है।
एसआईटी की टीम ने जब आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की तो आरोपियों के घरों से शराब की टेस्टिंग किट सहित खाली बोतलें भी बरामद हुई थी। पता चला था कि मोटे मुनाफे का लालच देकर आरोपी शेखर मजदूरों को अंबाला धनौरा गांव की अवैध शराब फैक्टरी में लाया था। पकड़े अधिकतर आरोपियों पर पहले भी मामले दर्ज है।