संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। एनडीपीएस की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरबिंद कुमार बंसल ने ड्रग्स मामले से जुड़ी आरोपी गुड्डी का बैंक खाता डी-फ्रीज करने की याचिका को खारिज कर दिया है। इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और तथ्यों को सक्रिय रूप से छिपाने का परिणाम बताया और नाराजगी प्रकट की है। आरोपी राजेश कुमार की पत्नी गुड्डी ने निकल्सन रोड स्थित एचडीएफसी बैंक के अपने खाते को डी-फ्रीज करने के लिए अर्जी दी थी।
गुड्डी और उसके परिवार के सदस्यों पर छापा मारने पहुंचे दल पर पथराव और हमला करने का मामला दर्ज किया गया था। गुड्डी के पति के गोदाम से 260 ग्राम स्मैक/हेरोइन और 1500 नशीले टैबलेट बरामद किए गए थे। एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत वित्तीय जांच में आरोपी, उसके पति और बेटी की कई संपत्तियां ड्रग मनी से प्राप्त पाई गईं, जिन्हें अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया था। सुनवाई के दौरान गुड्डी के वकील ने तर्क दिया था कि वाहन और बैंक खाता एक ही आदेश से जब्त किए गए थे। अदालतों ने पहले ही चार वाहनों को सुपुर्ददारी पर जारी कर दिया है। इसलिए खाते को भी डी-फ्रीज किया जाना चाहिए।
आरोपी गुड्डी केवल आईपीसी की धारा 307 के तहत गिरफ्तार हुई थी और उसे एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराधों में नामजद नहीं किया गया था और वह जमानत पर है। बैंक खाता उसकी रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाता है। लोक अभियोजक ने इस याचिका विरोध किया और साक्ष्य रखे। सुनवाई के दौरान अदालत ने ध्यान दिलाया कि आवेदक ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया कि सक्षम प्राधिकारी ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा के तहत संपत्ति को फ्रीज करने का आदेश पारित किया था। यह तथ्य, गुड्डी से संबंधित वाहन जारी करने वाले पिछले अदालती आदेशों में भी उल्लेखित नहीं था। दस्तावेजों के अवलोकन से पता चला कि गुड्डी ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सक्रिय रूप से भाग लिया था और ईमेल के माध्यम से दो जवाब भेजे थे, जिन पर फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि करने से पहले विचार किया गया था।