अंबाला। हरियाणा ग्रंथ अकादमी पंचकूला व आर्य गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर संस्कृत विभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैदिक मानव अनुसंधान प्रशिक्षण केंद्र, एनसीसी व एनएसएस के सहयोग से वैदिक साहित्य में राष्ट्रीय चेतना स्वामी दयानंद के संदर्भ में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि स्वामी दयानंद जैसा व्यक्तित्व हमारे राष्ट्र की नींव व आधार है। स्वामी दयानंद के विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना ही इस संगोष्ठी का उद्देश्य है। संयोजिका डॉ. सुनीता, संस्कृत विभागाध्यक्ष ने मंच संचालन करते हुए बताया कि चेतना को जगाकर उसे संस्कारों द्वारा निर्मल बनाकर देश के प्रति कर्त्तव्य पालन के लिए उत्साहित करना महर्षि दयानंद जैसे महापुरुषों के काम हैं। मुुख्यातिथि डॉ. रेनू फूलिया के अभिभाषण में अपने समाज में फैली कुरीतियों के बारे और उन कुरीतियों के उन्मूलन के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में बताया। संगोष्ठी संरक्षक व अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र चौहान ने बताया कि स्वराज तथा राष्ट्रभाषा हिंदी की वरीयता का उद्घोष करने का श्रेय स्वामी दयानंद को दिया जाता है। डॉ. अनीता अग्रवाल ने आर्य समाज को एक क्रांति बताया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पतंजलि विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. डॉ. महावीर, विशिष्ट अतिथि डीएवी कॉलेज यमुनानगर की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा आर्य आदि मौजूद रहे। स्वतंत्रता सेनानी वेद प्रकाश वेदालंकार, डॉ. सविता बजाज, डॉ. विनय मल्होत्रा, डॉ. उर्मिल गुप्ता, डॉ. शशी धमीजा, डॉ. राजेंद्रा, डॉ. राजेश कुमार तथा विभिन्न महाविद्यालय के प्राध्यापकों की उपस्थिति तथा भागीदारी से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।