शुक्रवार को लगभग ढाई दर्जन लोगों ने स्थानीय लघु सचिवालय में पहुंचकर रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम को शिकायत देकर बताया कि शिवालिक स्कूल ने उनके बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देना बंद कर दिया है। इसी को लेकर अभिभावक स्कूल में आए थे जब हमने इस बारे स्कूल के चेयरमैन से बात करनी चाही तो उन्होंने पूरी फीस भरने को कहा। परिजनों का आरोप है कि चेयरमैन ने उनके साथ दुर्व्यवहार कर कहा कि अभिभावकों को स्कूल की जरूरत है न कि स्कूल को अभिभावकों की। अभिभावक संदीप, संजीव, रणबीर, पवन कुमार, निर्मल प्रवीन कुमार आदि का कहना था कि वो सरकार की हिदायतों अनुसार ट्यूशन फीस तो देने को तैयार हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन ट्यूशन फीस के साथ ही अन्य फंड भी उनसे वसूल रहा है।
कुछ बच्चों की चार माह की फीस लंबित
स्कूल की प्रिंसिपल अनुराधा भाटिया का कहना है कि कुछ बच्चों की तरफ चार महीने की फीस बकाया है। उन्हें फीस जमा करवाने के लिए कहा गया था, ताकि स्कूल को यह तो पता चल जाए कि कौन बच्चा स्कूल में आना चाहता है या नहीं। यदि कुछ अभिभावक चार माह की इकट्ठी फीस नहीं दे सकते तो वो दो या तीन माह की फीस जमा करवा सकते हैं। बच्चों से सरकार के दिशानिर्देश अनुसार केवल और केवल ट्यूशन फीस ही ली जा रही है।
अभिभावकों के आरोप सही नहीं हैं। स्कूल में लगभग 35-40 व्यक्ति आए थे, जिन्हें इकट्ठे की बजाए 2 से 3 व्यक्तियों के ग्रुप में आने को कहा था जिस पर उनमें दे कुछ एक लोग गुस्सा हो गए।
अशोक कालड़ा, प्रबंधन समिति के सदस्य।