जल्द ही शहरवासियों को ऑक्सीवन की सौगात मिलेगी। इसे हर्बल पार्क के नजदीक करीब साढ़े 3 एकड़ में विकसित किया जाएगा। डीसी विक्रम सिंह ने वीरवार को हर्बल पार्क के पास खाली पड़ी जमीन का निरीक्षण किया। इस संबंध में शुक्रवार और शनिवार को पिंजौर में दो दिन की वर्कशॉप रखी गई है। इसी वर्कशॉप में ऑक्सीजन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
वहीं शुक्रवार को इस मामले में जमीन की लैंडमार्केशन की जाएगी। जुलाई माह के भीतर ही इस ऑक्सीवन के निर्माण का कार्य कर दिया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हर जिले में ऑक्सीवन वाटिका खोलने की घोषणा की थी यह प्रोजेक्ट उसी हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट में सेंट्रल जेल की चारदीवारी बाधा बन रही है। क्योंकि यहां निकल रही सड़क लैंड स्केपिंग में है। इसी कारण कहीं से सेंट्रल जेल की चारदीवारी छह फुट की नजर आती है तो कहीं चार फुट की लगती है। ऐसे में ऑक्सीवन बनाए जाने से पहले सुरक्षा की दृष्टि से इसे ऊपर उठाया जाएगा।
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जमीन किसकी जमाबंदी में नहीं आ रहा नजर
यहां खाली पड़ी कुछ जमीन वन विभाग की है तो कुछ हिस्सा पीडब्ल्यूडी, एनएएचआई और सेंट्रल जेल का भी है। अब किसी विभाग की कितनी जमीन है यह डिमार्केशन के बाद ही पता चला पाएगा क्योंकि जमाबंदी में यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि किसकी यह जमीन है। डिमार्केशन के बाद जिस विभाग की जितनी जमीन होगी वह विभाग उसे वन विभाग के नाम ट्रांसफर करवा देगा।
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शहर की सुंदरता बढ़ेगी
पार्क के बनने के बाद इस जगह की सुंदरता बढ़ेगी और लोगों को पार्क की सुविधा भी मिल सकेगी। इस जगह पर जो भी पेड़ जर्जर हैं या टहनियां झुकी हुई है उन्हें वहां से हटाया जाएगा। इस पार्क को कई हिस्सों में बांटा जाएगा और इसमें रास्ता भी बनाया जाएगा ताकि लोग आसानी से सैर कर सकें। इसका कुछ स्वरूप सिटी फोरेस्ट जैसे भी होगा।
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हर्बल पार्क के सामने बनाई जाएगी कैंटीन और शौचालय
वहीं हर्बल पार्क में आने वाले लोगों और सेंट्रल जेल में अपनों से मिलने वालों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर्बल पार्क के सामने जेल विभाग की खाली पड़ी भूमि पर कैंटीन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही शौचालय का निर्माण भी यहां करवाया जाएगा।
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हर्बल पार्क में करीब एक हजार से ज्यादा लोग रोज आते हैं। इसीलिए शहरवासियों को दूसरे पार्क की जरूरत है। ऑक्सीवन वाटिका की घोषणा भी मुख्यमंत्री ने की हुई है। ऐसे में यही विचार किया जा रहा है कि यहां पर ऐसा ही कुछ विकसित किया जाए। जल्द ही इस प्रोजेक्ट को शुरू कर दिया जाएगा।
विक्रम सिंह, डीसी अंबाला
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ऑक्सीवन का स्वरूप कैसे होगा इस बारे में दो दिन की वर्कशॉप में ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ढाई एकड़ में हर्बल पार्क है इससे बड़ा ही होगा ऑक्सीवन प्रोजेक्ट।
हैरतजीत कौर, वन विभाग अधिकारी।