कैथ माजरी क्षेत्र के एक राशन डिपो की ओर से इस माह करीब 200 बीपीएल और एपीएल कार्डधारकों को सस्ते राशन के नाम पर 22 क्विंटल एक्सपायर आटा वितरित कर दिया गया। इस आटे में कीड़े पड़ने से न केवल जाले बन गए हैं बल्कि बदबू भी आ रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि खराब आटा बांटकर उनकी सेहत के साथ यह खिलवाड़ किया गया है। वे बोले, पशुओं को भी हम यह बदबूदार आटा नहीं खिला सकते। इन लोगों ने बुधवार को विभाग और सरकार के खिलाफ रोष जताया।
गुस्साए लोगों ने कहा कि सरकारी डिपो से जो आटा इस बार हमें वितरित किया है उसे हम खुद खाना तो दूर गोवंश को भी नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण काम-काज ठप पड़े हैं। वहीं सरकार खराब आटा देकर हम लोगों का मजाक उड़ा रही है। लोगों का कहना है कि एक तो सरकार ने सरसों का तेल बंद कर दिया है और अब बाजरा बांटा जा रहा है। गर्मियों में इसका प्रयोग करने का कोई मतलब नहीं है। इससे अच्छा तो सरकार गेहूं दे दे। इसे पिसवाकर स्वयं प्रयोग कर लेंगे।
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मार्कर से बदली गई अंतिम तारीख
जिस बैग में लोगों को आटा वितरित किया गया है उस पर अंतिम तारीख को ब्लैक मार्कर के साथ बदला गया है। इससे पहले लिखी तारीख पर छठा महीना लिखकर उसे बिल्कुल ही छुपा दिया गया है। इसी वजह से लोगों को लग रहा है उन्हें इस बार जो आटा वितरित किया गया है वह एक्सपायर था।
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इस बार सरकार की ओर से जालीदार और बदबूदार आटा वितरित किया गया। इसे इंसान द्वारा तो क्या पशुओं द्वारा भी नहीं खाया जा सकता। सरकार ने राशन देना ही है तो कम से कम साफ-सुथरा तो दे। बस नाम कर रही है कि लोगों में राशन वितरित किया है।
- निर्मला।
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एक तो कोरोना काल में सरकार दावे कर रही है स्वच्छ रहो और साफ सुथरा खाना खाओ। उसके विपरीत सरकार की ओर से हम लोगों को गंदा व बदबूदार आटा वितरित किया जा रहा है। ऐसा आटा खाने तो अच्छा है हम रोटी ही न खाएं।
- सुदेश।
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आटे में जाले की गांठें बनी हुई है। इसे खाने का मतलब है कि बीमार होना। वैसे ही आजकल बीमारियों की कमी नहीं है अगर यह आटा खा लिया तो पता नहीं क्या होगा। अगर इसे पशु को डाला तो शायद हमें ही पाप चढ़ेगा।
- निर्मला शर्मा।
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सरकार को जनता में राशन वितरित करना ही है तो कम से कम साफ सुथरा तो वितरित करें। अगर आटा नहीं करना है तो उसकी जगह गेहूं कर दें। हम तो उसमें भी खुश है। मगर राशन वितरण का कार्य खानापूर्ति हो गया है।
- वीना।
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जिस बोरी में आटा आया था उसकी बोरी की अंतिम तारीख को मार्कर से साथ बदला गया है। जिससे साफ पता चलता है कि यह आटा एक्सपायर है और इसे जानबूझ कर लोगों में बांटा गया है।
- संतोष।
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अब पता नहीं सरकार ने ही ऐसा आटा भेजा है या सरकारी अधिकारी कुछ गड़बड़ कर रहे हैं। लेकिन हमारे पास जो आटा आया है वह बिल्कुल भी खाने लायक नहीं है। कुछ लोगों ने आटे के थैले के थैले कूड़े में डाल दिया है।
- कमलेश।
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एक तो वैसे ही कोरोना के कारण आर्थिक स्थिति खराब है। ऊपर से सरकार जो राशन दे रही है वह भी घटिया किस्म का है। खाना तो दूर घर पर रखना भी बेकार है। क्योंकि उस आटे में जाले की गांठें बनी हुई है।
- अनिता।
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सरकार आटे की जगह चाहे गेहूं दे दे। मगर साफ-सुथरी दे जो हम लोगों के काम आए। न कि ऐसी जिसे हमें कूड़े के ढेर में डालना पड़े। एक तो वैसे ही लोगों की आर्थिक स्थिति खराब चल रही है।
- सुनीता।
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आमतौर पर अकसर ऐसा नहीं होता। फिर भी अगर लोगों के घरों में जालीदार और बदबूदार आटा गया है तो मैं स्वयं चेक करवाता हूं। अगर संभव हुआ तो इस आटे को निश्चित तौर पर बदलवा दिया जाएगा।
- राजेश्वर मुदगिल, डीएफएससी, अंबाला।