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Ambala News: छह में एक ही मेडिकल ऑफिसर तैनात, उसे भी डेपुटेशन पर भेजा

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बराड़ा के सरकारी अस्पताल में मौजूद कर्मचारी।संवाद - फोटो : samvad
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सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में में चिकित्सा व्यवस्था ठप
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रेफर हो रहे मरीज
पूर्ण सिंह
बराड़ा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की काफी कमी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि खंड में मेडिकल ऑफिसर के 6 पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती केवल एक की है। एकमात्र डॉक्टर को भी डेपुटेशन पर पंजोखरा साहिब भेज दिया गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में है। डिलीवरी जैसे संवेदनशील मामले स्टाफ नर्सों के भरोसे हैं।
यही नहीं, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन न होने से न तो दवाइयां मिल पा रही हैं और न टेस्ट हो पा रहे हैं। इस कारण इलाज के नाम पर मरीजों को केवल रेफरल पर्ची थमाई जा रही है। इससे अस्पताल अब इलाज केंद्र की बजाय रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। सीएमओ रेनू बेरी ने कहा कि मामला संज्ञान में है। कोशिश की जा रही है कि स्थिति में सुधार हो।
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पीएचसी की हालत और भी दयनीय
सीएचसी के अधीन आने वाले बिहटा, केसरी और उगाला पीएचसी की स्थिति भी खराब है। बिहटा में स्टाफ नर्सों के 5 में से 3 पद खाली हैं। उगाला में तैनात एकमात्र डेंटिस्ट को आयुष्मान भारत योजना में लगा दिया गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मरीज निजी अस्पतालों के हाथों लुटने को मजबूर हैं। जब पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है तब सीएमओ और एसएमओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी छुट्टी पर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार के बाद अंबाला या मुलाना रेफर कर दिया जाता है। इससे रास्ते में ही जान जाने का खतरा बना रहता है। वहीं, उगाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल डॉ. बीरबल सिंह ही एकमात्र मेडिकल ऑफिसर हैं जबकि यहां के डेंटल सर्जन को आयुष्मान भारत योजना में डेपुटेशन पर लगाया गया है।

बराड़ा के सरकारी अस्पताल में मौजूद कर्मचारी।संवाद- फोटो : samvad

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