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Ambala News: किसान आंदोलन का एक साल पूरा, शंभू बॉर्डर पर महासम्मेलन आज

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अंबाला। किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान आंदोलन ने एक वर्ष पूरा कर लिया है। पिछले वर्ष 13 फरवरी को किसान हरियाणा पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर पर पहुंचे थे। यहां पर किसानों को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया था।
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इसके बाद से किसानों और पुलिस के बीच लगातार संघर्ष हुआ था। इस एक साल में किसानों और पुलिस के बीच 10 से 15 बार संघर्ष हुआ। कई किसानों की जान भी गई तो वहीं पुलिस कर्मी भी घायल हुए। एक साल पूरा होने पर किसानों ने वीरवार को शंभू माेर्चा पर किसान महापंचायत का आयोजन किया है। इसमें किसानों को आने के लिए सोशल मीडिया के जरिए निमंत्रण भेजा गया है। यहां किसान नेता जत्थेदारों को संबोधित करेंगे व आंदोलन की आगामी रणनीति साझा करेंगे।

सरकार-पुलिस के दबाव के बीच डटे हैं किसान

किसान मजदूर मोर्चा के नेता और भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के किसान नेता तेजवीर सिंह ने बताया कि एक साल तक चले आंदोलन ने देश में एक नजीर पेश की है। हम सरकार और पुलिस के दमन के बावजूद टिके रहे। शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष किया। लोगों ने भी पूरा साथ दिया। भूख हड़ताल सहित अन्य प्रकार के तरीकों से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का काम किया। यह आंदोलन काफी सफल रहा है।
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बदल गई जिंदगी

एक साल के इस संघर्ष ने स्थानीय निवासियों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। दैनिक कार्य, व्यापार व रिश्तेदारी में पंजाब जाने वाले अंबाला के लोगों को अब जंगल के रास्ते से नदी को पार कर पंजाब जाना पड़ता है। व्यापार की बात करें तो कपड़ा व्यापार के लिए पंजाब के ग्राहक काफी कम हो गए। ऐसे में कपड़ा व्यापारियों को माल लेकर पंजाब के इलाकों में जाने को मजबूर होना पड़ा। इसी प्रकार स्वर्णकार भी प्रभावित हुए।

करोड़ों के रुपये का टोल का नुकसान

शंभू बॉर्डर पर 13 फरवरी 2024 से टोल बंद है। इस टोल से एनएचएआई को प्रतिदिन करीब 70 लाख रुपये की आय होती थी। टोल के बाद होने से यह नुकसान 300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। टोल के नुकसान की भरपाई किस प्रकार होगी, कौन करेगा इस पर अभी तक सभी चुप बैठे हैं। वहीं, लोगों को पंजाब सीमा बंद होने से चंडीगढ़ या अंबाला के अन्य लिंक मार्गों से जाना पड़ रहा है। इस कारण से उनका समय भी बर्बाद हो रहा है और ईंधन भी अधिक खर्च हो रहा है।
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