अंबाला सिटी। अंबाला में कांग्रेस ही अपने सामने एक चुनौती बनकर खड़ी है। यहां टिकट पाने के लिए जो नेता लाइन में थे, अब उनमें से आधे भी नजर नहीं आ रहे। यही हाल भाजपा का दिख रहा है। ऐसी परिस्थिति ने चुनावी में प्रत्याशियों की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।
यदि बात करें शहर की तो यहां कांग्रेस ने निर्मल सिंह को टिकट मिला है। जोकि हुड्डा गुट से हैं। एक दिन पहले उन्होंने सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ अपने गुट के दो नेताओं को मना लिया मगर सैलजा गुट को अभी साथ नहीं कर पाए। मनाना तो दूर शायद किसी से बात भी नहीं हुई।
यही कारण है कि सैलजा गुट से सिटी में जितने नेता टिकट के लिए आवेदन कर चुके थे और उनके नाम टिकट की दौड़ में चल रहे थे, अब वे शांत हैं या यूं कहें कि लापता हो गए हैं। इतना ही नहीं पहले की तरह हुड्डा गुट के पोस्टरों में कुमारी सैलजा का पोस्टर तक नहीं हैं।
वहीं, अंबाला सिटी में भाजपा के खेमे में भी पंजाबी समाज और वैश्य समाज से कुछ लोग टिकट की दौड़ में थे मगर पार्टी ने जब पुराने चेहरे असीम गोयल पर भरोसा जताया ताे सभी शांत होकर बैठ गए। अब उनकी क्षेत्र में भागीदारी भी जगजाहिर है।
कैंट में तो अलग ढपली अलग राग
छावनी में कांग्रेस की अलग स्थिति है। यहां कुमारी सैलजा के गुट से आने वाले परविंदर सिंह परी उम्मीदवार हैं। यहां लगे पोस्टरों में भी कुमारी सैलजा को ही तरजीह देते ही प्रोजेक्ट किया जा रहा है। हालांकि कुछ सोशल मीडिया पोस्टों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी दिखाया गया है। मगर अधिकतर में कुमारी सैलजा ही नजर आती हैं। यहां कार्यालय में लगे पोस्टरों में सभी बड़े नेताओं को गुटबाजी से अलग स्थान दिया है। इस बात को भी छिपाया नहीं जा सकता है कि कांग्रेस आलाकमान टिकट न मिलने पर बागी हुईं हुड्डा गुट की नेत्री चित्रा सरवारा काे चुनाव में जाने से रोक नहीं पाया। यह खिलाफत कांग्रेस को भारी भी पड़ सकती है।
मुलाना में स्थिति ठीक, नारायणगढ़ में जस की तस
मुलाना विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां पर कांग्रेस में हुड्डा गुट से सांसद वरुण मुलाना परिवार ही वर्चस्व में रहा है। कुमारी सैलजा के गुट से कोई बड़ा नेता यहां से पहचान नहीं बना पाया। वहीं, नारायणगढ़ में कुमारी सैलजा के गुट से रामकिशन गुर्जर और शैली चौधरी विधायक भी रहे हैं। वहीं, हुड्डा गुट से अशोक मेहता चेहरे जो टिकट की दौड़ में थे, वे अब दिखाई नहीं दे रहे। टिकट वितरण के बाद अचानक से कांग्रेस में आई शांति हैरान कर रही है।